अगले साल से खत्म हो जाएगा पांच साल में ग्रेच्युटी वाला नियम, 1 अप्रैल 2021 से लागू होंगे चारों लेबर कोड


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नई दिल्ली31 मिनट पहले

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नए लेबर कोड में मजदूरों के लिए कई सुविधाएं और न्यूनतम मजदूरी का प्रावधान किया गया है।

  • 44 सेंट्रल लेबर एक्ट को मिलाकर तैयार किए गए हैं चार लेबर कोड
  • तीन लेबर कोड को बीते सत्र में ही संसद से मंजूरी मिली है

केंद्र सरकार की ओर से लाए गए चारों लेबर कोड 1 अप्रैल 2021 से एक साथ लागू हो सकते हैं। लेबर सेक्रेटरी अपूर्वा चंद्रा ने यह बात कही है। संसद के बीते सत्र में ही इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडिशन कोड को मंजूरी दी है। जबकि वेज कोड को 2019 में ही मंजूरी मिल गई थी। सरकार ने 44 सेंट्रल लेबर एक्ट को मिलाकर इन चारों कोड को तैयार किया है।

ड्राफ्ट रूल्स का काम शुरू

संवाददाताओं से बातचीत में चंद्रा ने कहा कि कहा कि हमने हाल ही में संसद से पास हुए तीनों लेबर कोड को लागू करने के लिए ड्राफ्ट रूल्स का काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि नवंबर के मध्य तक ड्राफ्ट रूल्स को नोटिफाई करने की कोशिश रहेगी। फीडबैक के लिए 45 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद चारों कोड को 1 अप्रैल से लागू करने के लिए फाइनल नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

लेबर मिनिस्टर ने दिसंबर से लागू करने की बात कही थी

लेबर मिनिस्टर संतोष गंगवार ने पिछले महीने कहा था कि चारों लेबर कोड को दिसंबर तक लागू किया जा सकता है। पिछले साल लेबर मिनिस्ट्री ने वेज कोड बिल को लागू करने के लिए ड्राफ्ट रूल्स जारी किए थे। लेकिन चारों लेबर कोड को एक साथ लागू करने के लिए मिनिस्ट्री ने ड्राफ्ट रूल्स को वापस ले लिया था। चारों लेबर कोड के नियमों को इंटर लिंक करने के लिए मिनिस्ट्री इन्हें एक साथ लागू करना चाहती है।

राष्ट्रपति से मिली मंजूरी

जब संसद से कोई नया कानून पास होता है तो उसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड, ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडिशन कोड को राष्ट्रपति से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। कोई भी कानून रूल्स का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही लागू होता है। नियमों के तहत शुरुआत में ड्राफ्ट रूल्स नोटिफाई किए जाते हैं। इन रूल्स पर फीडबैक लिया जाता है। रूल्स फाइनल होने के बाद कोई भी कानून अमल में आता है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप-10 में आना चाहता है भारत

सरकार ने भारत को विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस लिस्ट में टॉप-10 देशों में लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए ही सरकार ने लेबर कानूनों में बदलाव किया है। डूइंग बिजनेस 2020 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में 14 स्थानों की छलांग लगाकर 63वें स्थान पर आ गया है। बीते पांच सालों (2014-19) में भारत ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस लिस्ट में 79 स्थानों का सुधार किया है। ऊंची रैंकिंग से देश में निवेश को बढ़ावा मिलता है।

जानिए किस बिल से क्या प्रभाव पड़ेगा?

सोशल सिक्योरिटी कोड: इस कोड के तहत ईएसआईसी और ईपीएफओ की सुविधाओं को बढ़ाया गया है। इस कोड के लागू होने के बाद असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले वर्कर्स, गिग्स वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी ईएसआईसी की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल का इंतजार नहीं करना होगा।

ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडिशन कोड बिल 2020: इस बिल में लीव पॉलिसी और सेफ एनवायरमेंट तैयार करने की कोशिश की गई है। इस बिल के लागू होने के बाद 240 के बजाए 180 दिन काम के बाद ही लेबर छुट्टी पाने की हकदार बन जाएगी। इसके अलावा किसी कर्मचारी को कार्यस्थल पर चोट लगने पर कम से कम 50 प्रतिशत जुर्माना मिलेगा।

इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड बिल: इस बिल में कंपनियों को काफी छूट दी गई है। नए बिल के लागू होने के बाद 300 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां सरकार की मंजूरी के बिना छंटनी कर सकेंगी। 2019 में पेश किए गए इस बिल में 100 कर्मचारियों की सीमा थी, जिसे 2020 में बढ़ाकर 300 किया गया है।

वेज कोड बिल: इस बिल में पूरे देश के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सरकार पूरे देश के लिए कम से कम मजदूरी तय करेगी। सरकार का अनुमान है कि इस बिल के लागू होने के बाद देश के 50 करोड़ कामगारों को समय पर और निश्चित मजदूरी मिलेगी। इस बिल को 2019 में ही पास कर दिया गया था।



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