एंटी टैंक मिसाइल SANT का टेस्ट सफल, एक दिन पहले ही INS चेन्नई से ब्रह्मोस मिसाइल फायर की गई थी


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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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एंटी टैंक मिसाइल SANT को डीआरडीओ ने एयर फोर्स के लिए तैयार किया है। -फाइल फोटो

  • स्टैंड ऑफ एंटी टैंक मिसाइल लॉन्च के बाद लॉक-ऑन और और लॉन्च से पहले लॉक-ऑन क्षमताओं से लैस है
  • ब्रह्मोस ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना तेजी से वार कर सकती है, इसकी रफ्तार करीब 3457 किमी प्रति घंटे है

भारत ने सोमवार को ओडिशा तट से एंटी टैंक मिसाइल (SANT) का टेस्ट किया, जो सफल रहा। इसे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने एयर फोर्स के लिए विकसित किया है। मिसाइल लॉन्च के बाद लॉक-ऑन और और लॉन्च से पहले लॉक-ऑन क्षमताओं से लैस है।

एक दिन पहले रविवार को इंडियन एयरफोर्स ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के सफल टेस्टिंग पर डीआरडीओ को शुभकामनाएं दी थीं। डीआरडीओ ने बताया था कि रविवार सुबह चेन्नई में इसे नेवी के स्टील्थ डेस्ट्रॉयर जहाज (इसे दुश्मन का रडार नहीं पकड़ सकता) INS चेन्नई से फायर किया गया। इसने इस टेस्ट फायर में अरब महासागर में एक टारगेट पर सटीक निशाना लगाया।

ब्रह्मोस को जमीन, जहाज और फाइटर जेट से दागा जा सकता

यह मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना तेजी से वार कर सकती है। इसकी रफ्तार करीब 3457 किमी प्रति घंटे है। यह 400 किमी की रेंज तक निशाना लगा सकती है। सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, जहाज और फाइटर जेट से दागा जा सकता है। मिसाइल के पहले एक्सटेंडेड वर्जन का परीक्षण 11 मार्च 2017 को किया गया था। ब्रह्मोस का नाम दो नदियों के नाम से लिया गया है, इसमें भारत की ब्रह्मपुत्र नदी का ‘ब्रह्म’ और रूस की मोस्क्वा नदी से ‘मोस’ लिया गया है।

दो हफ्ते में दूसरी बार हुआ मिसाइल का टेस्ट
डीआरडीओ ने टेस्ट सफल रहने पर कहा- ब्रह्मोस एक प्राइम स्ट्राइक वेपन है। इससे हमारे जंगी जहाजों को लंबी दूरी तक सतह से सतह पर वार करने में मदद मिलेगी। दो हफ्ते पहले भी ओडिशा के चांदीपुरा स्थित इंटिग्रेटेड टेस्ट रेंज में इसे टेस्ट किया गया था। उस समय भी इसने परीक्षण के सभी मापदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया था।

भारतीय सेना के बेड़े में शामिल है ब्रह्मोस
इसे भारत के डीआरडीओ ने रूस के एनपीओ मैशिनोस्ट्रोनिया (एनपीओएम) के साथ मिलकर तैयार किया है। ब्रह्मोस उन चुनिंदा सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल हैं जो भारतीय वायुसेना और नौसेना के बेड़े में शामिल है। नए संस्करण का प्रपुल्शन सिस्टम, एयरफ्रेम, पावर सप्लाई समेत कई अहम उपकरण देश में ही विकसित किए गए हैं। यह मुख्य तौर पर पनडुब्बियों, जहाजों और नौकाओं को निशाना बनाने में मददगार साबित होगी।



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