काठमांडू में चीन की एम्बेसी के सामने विरोध प्रदर्शन; जिनपिंग सरकार ने कहा- हमने नेपाल की जमीन पर कब्जा नहीं किया


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काठमांडू11 मिनट पहले

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काठमांडू में बुधवार को चीन के दूतावास के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। चीन पर आरोप है कि उसने नेपाल के हुमला जिले में बड़े पैमाने पर कब्जा किया और यहां 11 इमारतें बनाईं। चीन इन आरोपों को गलत बता रहा है।

  • नेपाल के हुमला जिले में चीन ने 11 इमारतें बनाई हैं, इनमें से 9 का निर्माण कुछ ही दिन पहले हुआ
  • स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद नेपाल के गृह मंत्रालय ने जांच के लिए यहां एक टीम भेजी थी

नेपाल में चीन के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। नेपाल की जमीन पर चीन के कब्जे की खबरें सामने आने के बाद बुधवार को राजधानी काठमांडू में चीनी दूतावास के सामने लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद चीन ने बयान जारी किया। कहा- हमने नेपाल की जमीन पर किसी तरह का कब्जा नहीं किया। केपी शर्मा ओली सरकार इस बारे में फिर जांच करे।

विरोध प्रदर्शन में ज्यादातर छात्र
काठमांडू में चीन की एम्बेसी के बाहर सैकड़ों लोगों ने हाथ में बैनर और पोस्टर लेकर जिनपिंग सरकार की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। ये लोग हुमला जिले में चीनी सेना के कब्जे से नाराज थे। विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने वालों लोगों में ज्यादातर छात्र थे। इन लोगों का आरोप है कि चीन हुमला जिले के बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुका है। यहां उसने इमारतें खड़ी की हैं और इस क्षेत्र के लोगों को यहां जाने से रोका जाता है।

चीन की सफाई
नेपाल में अपने खिलाफ विरोध प्रदर्शन से चीन परेशान होने लगा है। काठमांडू में करीब तीन घंटे चले विरोध प्रदर्शन के बाद चीनी दूतावास ने एक बयान जारी कर सफाई देने की कोशिश की। कहा- हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि नेपाल के साथ हमारा किसी तरह का सीमा विवाद नहीं है। हुमला जिले में चीन ने जो निर्माण किया है, वो अपनी सीमा में किया है। नेपाल सरकार को इस बारे में जांच कर तस्वीर साफ करनी चाहिए।

विवाद की वजह क्या
नेपाल के अखबार ‘काठमांडू पोस्ट’ में बुधवार सुबह एक रिपोर्ट पब्लिश हुई। इसके मुताबिक, हुमला जिले में चीन ने 11 बिल्डिंग्स बनाई हैं। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत अफसरों से की। इसके बाद गृह मंत्रालय की एक टीम यहां पहुंची। वहां चीनी सैनिक मौजूद थे। स्थानीय लोगों को चीनी सैनिक यहां आने भी नहीं देते। बताया जाता है कि नेपाल की जमीन पर कब्जा करने के लिए चीनी सैनिकों ने यहां लगे कई पिलर गायब कर दिए।

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