चीन और दुबई से फर्जी कारोबार दिखाकर 1700 करोड़ की हेराफेरी, सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा  


सीबीआई ने रोटोमैक समूह के मालिक उद्योगपति विक्रम कोठारी पर फ्रॉड का नया केस दर्ज किया है। नई एफआईआर में कोठारी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया से 806 करोड़ रुपए धोखाधड़ी करके लिए। इसी राशि से फर्जी कारोबार दिखाकर कुल 1700 करोड़ की हेराफेरी कर डाली। नई एफआईआर में विक्रम कोठारी की पत्नी साधना और बेटे राहुल को भी शामिल किया गया है। दोनों ही रोटोमैक ग्लोबल में निदेशक थे। सीबीआई द्वारा कोठारी पर दर्ज कराई गई ये तीसरी एफआईआर है। पहली एफआईआर फरवरी 2018 और दूसरी फरवरी 2020 में कराई गई थी। 

सीबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक ऑफ इंडिया ने 2002 से कोठारी को लोन देना शुरू किया। सितंबर 2015 में खाते एनपीए हो गए। 1992 में रोटोमैक पेन्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी का जन्म हुआ था। पेन बनाने से बिजनेस शुरू करने वाली रोटोमैक ने दस साल के अंदर आयात-निर्यात, अनाज की ट्रेडिंग, भारी औद्योगिक उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, पॉलीमर्स, स्क्रैप, रत्न, आभूषण, कोयला और इस्पात कारोबार में अरबों रुपए निवेश किए। वर्ष 2008 में कंपनी ने अपना नाम रोटोमैक पेन्स से बदलकर रोटोमैक ग्लोबल कर दिया। 

पैसा किसी मद में, लगा दिया कहीं और
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि आरोपियों ने बैंक को धोखा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बैंक से मिले लोन को चुपचाप दो अन्य कंपनियों, क्राउन एल्बा राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और रोटोमैक पॉलीमर्स प्राइवेट लिमिटेड में डायवर्ट कर दिया। फॉरेंसिक ऑडिट में खातों में बेहद गंभीर अनियमितताएं पकड़ी गईं। 

विदेशी बंदरगाहों से दिखाया फर्जी कारोबार
रोटोमैक में वर्ष 2013-14 में 1578 करोड़ रुपए का फॉरेन एक्सचेंज घाटा दिखाया। वर्ष 2014-15 में 159 करोड़ का घाटा दिखाया। घाटा छिपाने के लिए कंपनी ने चार सहयोगी कंपनियों से 1273 करोड़ रुपए कागजों में लिए। कोठारी की दूसरी कंपनी रोटोमैक एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी 2013 से 2015 के बीच 1317 करोड़ का नुकसान दिखाया। सीबीआई को छानबीन में तमाम दस्तावेज मिले हैं, जिसमें चीन और दुबई के बंदरगाहों से माल की सप्लाई दिखाई गई है लेकिन वास्तव में इन बंदरगाहों से कभी रोटोमैक ने कोई व्यापार ही नहीं किया। इस बहाने से कंपनी ने वर्ष 2013-14 में 1226 करोड़ रुपए और 2014-15 में 479 करोड़ रुपए डायवर्ट किए। यानी कागजी कारोबार दिखाकर करीब 1700 करोड़ रुपए का हेरफेर किया गया।



Source link

Be the first to comment

Leave a Reply