चीन से आने वाले इन्वेस्टमेंट पर सरकार सख्त रवैया अपनाएगी, अबतक भारतीय स्टार्टअप्स में चाइनीज इन्वेस्टर्स ने 30 हजार करोड़ रु. निवेश किए


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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  • भारत में हांगकांग के 111 और चीन के 16 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) रजिस्टर हैं
  • अप्रैल 2000 से जून 2020 के बीच हांगकांग के एफडीआई ने 4.51 बिलियन डॉलर निवेश किया
  • मार्च 2020 तक भारत के 30 में से 18 स्टार्टअप यूनिकॉर्न में चीन निवेशकों का निवेश है

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव का असर भारत में आने वाले निवेश पर भी पड़ रहा है। केंद्र सरकार चीन की कंपनियों द्वारा भारत में निवेश पर सख्ती बरत रही है। इस पर देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि कुछ देशों की कंपनियों पर हमारी नजर है। इससे भारत में स्टार्टअप को मिलने वाले निवेश पर भी असर पड़ सकता है।

फिक्की के इंवेंट में एक सवाल का जवाब देते हुए केवी सुब्रमण्यम ने कहा कि, सीमा पर तनाव के चलते सीमा पार से आने वाले निवेशों की छानबीन करना आवश्यक है। इसमें केवल प्रत्यक्ष निवेश ही नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष निवेश भी शामिल है।

देश में चीन की कंपनियों के निवेश पर सख्ती

दरअसल, इसी साल अप्रैल में डीपीआईआईटी ने प्रेस नोट 3 जारी किया था। इसके अनुसार भारत की सीमा से लगने वाले देशों के व्यक्ति या कंपनियां सरकार की मंजूरी प्राप्त करने के बाद ही किसी भी सेक्टर में निवेश कर सकती हैं। इस निर्णय से चीन और हांगकांग जैसे क्षेत्रों से होने वाले विदेशी निवेश पर असर पड़ा है। हालांकि, केवी सुब्रमणियम को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में दूसरे देशों की प्राइवेट इक्विटी फर्म इस कमी को पूरा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि अन्य देशों की प्राइवेट इक्विटी फर्म भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश को लेकर काफी उत्साहित है।

भारत में एफपीआई द्वारा निवेश

इस समय भारत में हांगकांग के 111 और चीन के 16 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) रजिस्टर हैं। एफपीआई भारत में बड़ी भूमिका में हैं। देश में पिछले साल एफपीआई ने कुल 18 बिलियन डॉलर (1.31 लाख करोड़ रुपए) निवेश किया था। दूसरी ओर अप्रैल 2000 से जून 2020 के बीच हांगकांग के एफडीआई ने 4.51 बिलियन डॉलर निवेश किया। जबकि इसी अवधि में चीन से सिर्फ 2.41 बिलियन डॉलर निवेश हुआ था।

भारतीय स्टार्टअप्स में चीन के टेक इन्वेस्टर्स का निवेश

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय स्टार्टअप्स में चीन के टेक इन्वेस्टर्स ने 4 बिलियन डॉलर (29.34 हजार करोड़ रुपए) का निवेश किया है। मार्च 2020 तक भारत के 30 में से 18 यूनिकॉर्न में चीन निवेशकों का निवेश है। भारत में चीन की अलीबाबा, टेंशेंट और बायडांस कंपनियों ने अमेरिका कि दिग्गज फेसबुक, अमेजन और गूगल जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है। इसके अलावा भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में भी चीन की कंपनियों का मार्केट शेयर 72% है। चीन की ओप्पो और शाओमी जैसी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने सैमसंग और एपल को पीछे छोड़ दिया है।



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