चेतन चौहान को कभी नहीं रहा शतक न बना पाने का मलाल, 80 से 97 रन के बीच नौ बार आउट हुए


चेतेंद्र प्रताप सिंह चौहान (चेतन चौहान) ने सलामी बल्लेबाज के तौर कई यादगार पारियां खेलीं मगर शतक नहीं बना पाए। लेकिन धैर्य और जुझारूपन से लबरेज चेतन को कभी इसका मलाल नहीं रहा। चेतन 80 से 97 रन के बीच नौ बार आउट हुए। फिरोजशाह कोटला में जब उनसे एक बार यह सवाल पूछा गया तो वह ठहाका मार कर हंसे। चौहान ने कहा था कि दूसरे बल्लेबाजों को वह शतक न बना पाने पर मायूस होते उन्होंने देखा, लेकिन उन्हें इस बात का कोई मलाल नहीं रहा। उन्होंने 1969 से 81 तक 40 टेस्ट मैच खेले और 2080 रन बनाए। वे टेस्ट क्रिकेट के ऐसे पहले बल्लेबाज हैं, जिन्होंने बिना शतक के 2000 रन पूरे किए थे।

गावस्कर के साथ सफल सलामी जोड़ी पर उन्होंने गर्व जताया। चौहान उन पहले बल्लेबाजों में से थे, जिन्होंने हेलमेट लगाकर बैटिंग शुरू की। चौहान ने कहा कि हमने बॉब विलिस, माइक हेंड्रिक्स, इयान बाथम का सामना किया। डेनिस लिली, लेन पेस्कोए और रोडनी हॉग का भी बेहद उछाल भरी पिच पर सामना किया।

जब गावस्कर पर प्रतिबंध लगने से बचाया था
1981 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 182 रन से पिछड़ने के बाद भारत ने दूसरी पारी में 324 रन बना लिए थे, जब गावस्कर 70 रनों के स्कोर पर खेल रहे थे तब अंपायर ने उन्हे डेनिस लिली की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया। गावस्कर ने इसका विरोध किया और पिच पर खड़े रहे। वहीं, डेनिस लिली ने उनके पास जाकर पैड की तरफ इशारा किया कि गेंद यहां लगी है। बस बात बहस में बदल गई। 

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गावस्कर इतने गुस्से में थे कि वे दूसरे छोर पर खड़े चेतन चौहान का हाथ पकड़कर मैदान के बाहर जाने लगे। चौहान गावस्कर को समझाते रहे। मगर वे किसी की सुनने को तैयार ही नहीं थे। चौहान ने टीम मैनेजर रहे ग्रुप कैप्टन शाहिद अली खां दुर्रानी को तुरंत बुलाया। वे दौड़ते हुए बाउंड्री लाइन के पास पहुंचे और गावस्कर को धक्का देते हुए मैदान के अंदर किया। चौहान ने बताया था कि अगर गावस्कर बाउंड्री लाइन पार कर जाते तो पांच साल का प्रतिबंध लग जाता। भारत ने यह मैच 59 रन से जीता था। मैच में चेतन चौहान ने बेहद धैर्य के साथ 85 रन की पारी खेली थी।

डीडीसीए की सूरत बदलने में सफल रहे
चेतन चौहान ने उस वक्त डीडीसीए की कमान संभाली जब भ्रष्टाचार को लेकर संस्था की छवि पर सवाल उठ रहे थे, जिसे उन्होंने बदला। उनके दौरान गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ी निकले। गौतम गंभीर और नवदीप सैनी के चयन को लेकर उनकी राय भी सही साबित हुई।





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