ट्रम्प के ननिहाल स्काॅटलैंड के लोग चाहते हैं कि वे चुनाव हार जाएं, कहते हैं- जिसने अपनों को ही ठगा, वो किसका सगा


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एक घंटा पहले

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गांव के लोग चाहते हैं कि ट्रम्प के फाइनेंस और टैक्स चोरी की जांच हो और उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए। (फाइल फोटो )

  • गोल्फकोर्स रिसॉर्ट बनाने के लिए ट्रम्प ने गांव बाल्मेडी की बिजली-पानी बंद करा दी थी
  • लोग बोले- करोड़ों के निवेश व रोजगार का झांसा देकर हमें बर्बाद किया

(एबरडिन शायर) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ननिहाल स्काॅटलैंड के लोग नहीं चाहते कि ट्रम्प दोबारा सत्ता संभालें। स्कॉटलैंड के एबरडिन शायर में बाल्मेडी नाम का गांव है। इसे मेनी भी कहा जाता है। यहां रहने वाली सुजैन केली कहती हैं- ‘हम तो उनके अपने थे। हमें तक नहीं बक्शा। बर्बाद करके रख दिया।’

12 साल पुराने गोल्फकोर्स रिसाॅर्ट बनाने के मामले में ट्रम्प ने गांव वालों की बिजली-पानी की लाइन तक कटवा दी थी। इसलिए अब वे चाहते हैं कि ट्रम्प के फाइनेंस और टैक्स चोरी की जांच हो और उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

2006 में ट्रम्प ने खरीदी थी 1400 एकड़ जमीन

दरअसल, साल 2006 में ट्रम्प ने मेनी गांव में 1400 एकड़ जमीन खरीदी थी। यहां विश्वस्तरीय गोल्फकोर्स रिसॉर्ट बनाने के नाम पर उन्होंने 10 हजार करोड़ रुपए निवेश का भरोसा दिलाया। यह भी कहा कि इससे 6 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। 2008 में जब गोल्फकोर्स बनाना शुरू किया, तब लोगों को पता चला कि उन्हें जबरन मकान से बेदखल किया जा रहा है। ट्रम्प नहीं चाहते थे कि उनकी प्रॉपर्टी से गरीब और उनके मकान दिखाई पड़ें।

लोगों पर दबाव डालने के लिए उनके घरों के पानी-बिजली का कनेक्शन कटवा दिया। आसपास के सैकड़ों पेड़ उखड़वाकर उनकी जमीन पर इतना मलबा डाल दिया कि वहां आसपास के घर दिखने ही बंद हो गए। इन घरों से जो समुद्र दिखता था, उसकी जगह सिर्फ मलबा दिखने लगा। पुलिस से लेकर आला अफसरों तक शिकायत की गई पर कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टे यहांं की रॉबर्ट गार्डन यूनिवर्सिटी ने ट्रम्प को बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मानद डिग्री दे दी।

इसके खिलाफ उसी यूनिवर्सिटी के भूतपूर्व प्रिंसिपल ने अपनी डिग्री लौटाकर विरोध भी दर्ज करवाया था। ट्रम्प की इसी डिग्री के खिलाफ सुजैन ने अभियान शुरू किया। इसमें करीब 6 लाख लोगों ने दस्तखत कर मांग की कि यह डिग्री निरस्त होनी चाहिए। इस अभियान के बाद ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर में सांसदों ने बहस की कि क्यों न ट्रम्प के यूके आने पर पाबंदी लगा दी जाए।

ट्रम्प ने विवाद पर बनी फिल्म ‘यू हैव बिन ट्रम्प्ड’ पर पाबंदी लगा दी थी

एंथनी बैक्सटर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं। इन्होंने 2011 में ‘यू हैव बिन ट्रम्प्ड’ नाम की फिल्म बनाई। इस फिल्म को ट्रम्प ने ब्रिटेन-अमेरिका सहित कहीं भी रिलीज नहीं होने दिया। 2016 के चुनाव से पहले बैक्सटर ने घोषणा की उन्होंने इस फिल्म का भाग-2 भी बनाया है। इसमें तब 92 वर्षीय मौली को नदी से पानी भरकर अपने टॉयलेट में डालते हुए दिखाया गया है। फिल्म के रिलीज पर केस चलता रहा और जुलाई 2020 में इन फिल्मों की रिलीज की अनुमति मिली। ट्रम्प के लिए चिंता का विषय यह है कि यूरोप ही नहीं, अमेरिका में भी सोशल मीडिया पर ये दोनों फिल्में जंगल में आग की तरह फैल रही हैं।



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