ट्रम्प के सहयोगी राज्यों के नेताओं को बता रहे- राष्ट्रपति जीत जाएंगे, वे बाइडेन से आगे चल रहे हैं, लेकिन राह बहुत आसान नहीं है


वॉशिंगटन14 मिनट पहले

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  • ट्रम्प चुनाव तक लगातार इवेंट्स में हिस्सा लेने वाले हैं, अंतिम हफ्तों में तो एक दिन में तीन-तीन रैलियां करने की योजना बना रहे हैं
  • न्यूज चैनल के पोल्स में ट्रम्प को कई राज्यों में बाइडेन से पीछे दिखाया जा रहा है, हालांकि ट्रम्प कैंपेन को कड़ी टक्कर होने की उम्मीद

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी कैंपेन टीम उम्मीदों से भरी है और बहादुरी दिखा रही है। जब वे रिपब्लिकन पार्टी के डोनर्स और राज्यों के नेताओं से मिलते हैं तो बताते हैं कि ट्रम्प जो बाइडेन से जीत जाएंगे। टेलीविजन पर कैंपेन के दौरान भी ट्रम्प और उनका परिवार चुनाव में उनकी हार की आशंका से इनकार करते हैं। चुनाव तक लगातार ट्रम्प इवेंट्स में हिस्सा लेने वाले हैं। अंतिम हफ्तों में तो एक दिन में तीन-तीन रैलियां करने की योजना बना रहे हैं।

ट्रम्प जब भी वे अपनी हार की के बारे में सोचते हैं, वे इसपर यकीन करते नजर नहीं आते, इससे इनकार करते हैं। उन्होंने शुक्रवार को एक रैली में लोगों से पूछा- क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि मैं हार सकता हूं?

व्हाइट हाउस चीफ मार्क मिडोस भी नाराज

निजी तौर पर ट्रम्प की टीम के ज्यादातर मेम्बर यह मानते हैं कि उनकी जीत की संभावना काफी कम है। अपने कैंडिडेट और कैमरा से दूर होने पर ट्रम्प के सहयोगी इस बात को मानते हैं कि उनके सामने क्या राजनीतिक संकट है। उनके अपने सर्किल के बीच ही एक दूसरे पर आरोप लगाने और पीछे बुराई शुरू हो गई है। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज पर प्रेसिडेंट और कुछ पॉलिटिकल एडवाइजर ट्रम्प के हॉस्पिटलाइजेशन की मिसहैंडलिंग का आरोप लगा रहे हैं। चुनाव के बाद तक उनकी नौकरी बचने की संभावना नजर नहीं आती।

ट्रम्प कैंपेन के मिड-लेवल कर्मचारी परेशान

ट्रम्प की कैंपेन मैनेजर बिल स्टेपियन ने भी कई सीनियर रिपब्लिकंस को बताया है कि राष्ट्रपति चुनाव में आगे रास्ता मुश्किल है। कैंपेन में मिड-लेवल पर काम करने वाले कुछ साथी चुनाव के बाद की योजना बना रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें इलेक्शन के बाद कैपिटल हिल (जहां व्हाइट हाउस है) में काम मिलेगा, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि अगली बार ट्रम्प प्रशासन नहीं होगा। उनके लिए काम करने वाले प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को संदेह है कि कैंपेन में काम करना उनके आगे के करियर के लिए कितना मददगार होगा।

कई रिपब्लिकन स्ट्रैटजिस्ट ट्रम्प के बर्ताव से परेशान

चुनाव में तीन हफ्ते से भी कम का समय बचा है। ट्रम्प के ट्रम्प से जुड़े 12 से ज्यादा रिपब्लिकन स्ट्रैटजिस्ट्स से बात करने के बाद दूसरी ही बात निकल के सामने आई है। इनमें से कुछ ऐसे हैं तो ट्रम्प के खासे करीबी हैं। कई तो इस्तीफा तक देने का मन बना चुके हैं। वे इस कोशिश में हैं कि कैंपेन के दस आखिरी स्टेज में राष्ट्रपति को खुश रखा जाए। कोई बेहतर रणनीति बनाने के बजाय ट्रम्प को ट्विटर से दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। अक्सर इन लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट खुद ट्रम्प ही होते हैं।

मजबूत संदेश देने पर ट्रम्प का ध्यान नहीं

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में ट्रम्प एक मजबूत संदेश नहीं दे पा रहे हैं। ट्रम्प को कोशिश करनी चाहिए कि वे लोगों के बीच अपने बारे में बनी राय को बदलने की कोशिश करें। बताएं, कि वे कोरोना से निपटने के लिए क्या कर सकते हैं। वे कैसे बाइडेन से भी बेहतर ढंग से अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकते हैं। इन सब बातों को छोड़ कर वह दूसरी बातों में उलझे हुए हैं। वे अपने विरोधियों पर हमले कर रहे हैं, आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमित होने पर खुद को विक्टिम बताने की कोशिश की। हालांकि, इससे उनके अपने ही कोरोना टेस्टिंग पर सवाल उठने लगे।

ट्रम्प भाषणों में इकोनॉमी पर फोकस नहीं करते

रिपब्लिकन की आयोवा स्ट्रैटजिस्ट डेविड कोशेल ने कहा- पार्टी के कई कंसल्टेंट हताश हो चुके हैं। वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति अपने भाषणों में इकोनॉमी पर फोकस करें। उनका अब तक सबसे अच्छा मैसेज था कि ट्रम्प ने अमेरिका की इकोनॉमी को ग्रेट बनाया लेकिन कोरोना महामारी ने इसे तहस नहस कर दिया। अब ट्रम्प इसे दोबारा पटरी पर लाने के बाइडेन से अच्छा विकल्प है। हालांकि रिपब्लिकन बेस को हंटर बाइडेन, लैपटॉप और मेयर गियुलियानी जैसे मुद्दे पसंद हैं, लेकिन वे हमसे पहले से जुड़े हैं। नए वोटर्स को साथ लाने के लिए भी कुछ करना चाहिए।

कैंपेन के सीनियर लोगों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

स्टेपियन और जैसन मिलर समेत कैंपेन से जुड़े कई नेताओं के दावे अलग है। वे कहते हैं रिपब्लिकन पब्लिक पोल्स में दिखाए जा रहे नतीजों से बेहतर परफॉर्म करेगी। उनका कहना है कि कैंपेन के अपने डेटा से ऐसा लगता है कि एरिजोना और पेनसिल्वेनिया समेत कई राज्यों में कड़ी टक्कर रहेगी। हालांकि, न्यूज ऑर्गनाइजेशंस ने अपने पोल में ऐसा नहीं किया है। पिछले चार साल से वोटर रजिस्ट्रेशन एंड टर्न-आउट का सिस्टम तैयार किया है। इसका फायदा पार्टी को मिलेगा।



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