दिल्ली दंगे : ताहिर हुसैन के दो रिश्तेदारों को मिली बेल, कोर्ट ने कहा- आरोपियों के खिलाफ न कोई FIR, न कोई सबूत


दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी हिस्से में फरवरी में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में दो आरोपियों को जमानत दे दी और कहा कि किसी एफआईआर में उनका नाम नहीं है और ना ही उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप हैं।

अदालत ने रशीद सैफी और मोहम्मद शादाब को राहत प्रदान कर दी। अभियाजन पक्ष ने दोनों के खिलाफ दावा किया कि वे आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के रिश्तेदार हैं जो मुख्य साजिशकर्ता हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने दंगों के दौरान दयालपुर इलाके में एक दुकान में लूटपाट और आग लगाने के मामले में दोनों को जमानत दी। उन्हें 20,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर राहत दी गई।

अदालत ने कहा कि आवेदकों (सैफी और शादाब) का नाम न तो किसी एफआईआर में लिया गया है और ना ही उनके खिलाफ कोई विशिष्ट आरोप हैं। इसके अलावा कोई सीसीटीवी फुटेज भी नहीं है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जांच के दौरान अपराध में उनकी कथित भूमिका सामने आई और उन्हें गिरफ्तार किया गया तथा मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

दिल्ली दंगे में 53 लोगों की हुई थी मौत

गौरतलब है कि नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया।

इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी। 



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