दिल्ली दंगों की नई चार्जशीट पर 21 को होगी सुनवाई, ताहिर हुसैन समेत इन 15 आरोपियों को पेश होने का निर्देश


दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व  पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के प्रावधानों के तहत दायर चार्जशीट का संज्ञान लिया। अदालत इस मामले में 21 सितंबर को सुनवाई करेगी।

अदालत ने आज दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह चार्जशीट की कॉपी आरोपी व्यक्तियों को उपलब्ध कराए। इसके साथ ही कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख 21 सितंबर को कोर्ट में पेश हों।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली दंगों के मामले में ‘आप’ के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 15 आरोपियों के खिलाफ बुधवार को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA), आईपीसी और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत कड़कड़डूमा कोर्ट में 17,000 से अधिक पन्नों की एक और चार्जशीट दायर की थी।

चार्जशीट में ताहिर हुसैन के अलावा इशरत जहां, मुहम्मद परवेज अहमद, मुहम्मद इल्यास, सैफी खालिद, मिरान हैदर, सफूरा जरगर, सफा उर रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, तस्लीम अहमद, सलीम मल्लिक, अथर खान के नाम शामिल हैं। हालांकि इस चार्जशीट में उमर खालिद और शरजील इमाम का नाम शामिल नहीं है। उन्हें कुछ दिन पहले ही गिरफ्तार किया गया था, उनका नाम सप्लीमेंट्री चार्जशीट में होगा।

कुल 17,500 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने अदालत में कहा कि दिल्ली हिंसा के मामले में कुल 747 लोगों को गवाह बनाया गया है। स्पेशल सेल ने अदालत से कहा कि उसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा की सभी एफआईआर का अध्ययन किया है। इस मामले में आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दायर करेंगे जिसमें और आरोपियों को शामिल किया जाएगा। 

पुलिस ने अदालत को बताया कि दिल्ली हिंसा के मामले में कुल 747 लोगों को गवाह बनाया है। करीब साढ़े सत्रह हजार पन्नों की चार्जशीट में 2,692 पन्ने चार्जशीट का ऑपरेटिव हिस्सा है। स्पेशल सेल ने अदालत को बताया कि उसे चार्जशीट पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों से अनुमति मिल गई है।

दिल्ली दंगे में 53 लोगों की हुई थी मौत

गौरतलब है कि नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया।

इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी। 





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