नवांशहर में खौफ की 35 रातों के बाद 36वें दिन आया नया उजाला, मोगा-फतेहगढ़ साहिब के 6 तब्लीगियों समेत 8 लोग और स्वस्थ


  • मोगा जिले के गांव चीदा से 4 अप्रैल को रेड करके मुंबई के 13 तब्लीगियों को आइसोलेट किया गया, चार थे पॉजिटिव
  • फतेहगढ़ साहिब में भी महाराष्ट्र के औरंगाबाद के 11 लोगों के समूह में से दो महिलाओं को संक्रमण की हुई थी पुष्टि

दैनिक भास्कर

Apr 23, 2020, 03:54 PM IST

जालंधर. नवांशहर जिले ने कोरोना के खौफ से आजादी पा ली है। एक-दो नहीं पूरी 35 रातें खौफ में बीतने के बाद 36वां दिन आशा की नई किरण लेकर निकला। जिले में सबसे पहले संक्रमित के रूप में पठलावा के पाठी की मौत भले ही हो गई, लेकिन उसके बाद राज्य का पहला हॉटस्पॉट बने इस जिले के बाकी 18 लोग एक-एक करके ठीक हो गए हैं। रोपड़ में भी एक मौत के अलावा बाकी दोनों संक्रमित स्वस्थ हैं। इसी तरह मोगा में चार और फतेहगढ़ साहिब में 2 कोरोना पॉजिटिव ठीक हो चुके हैं। ये 6 तब्लीगी जमात से जुड़े हैं।

7 मार्च को इटली से लौटे बुजुर्ग पाठी बने थे कोरोना ड्राइवर
7 मार्च को इटली से गांव पठलावा के 70 वर्षीय बुजुर्ग पाठी अपने दो साथियों के साथ लौटे थे। 16 मार्च को उनकी तबीयत खराब हुई और 18 मार्च को बुजुर्ग की मौत हो गई। रिपोर्ट में सामने आया कि बुजुर्ग कोरोना संक्रमित थे। 7 से 18 मार्च के बीच कोरोना नवांशहर से निकलकर होशियारपुर और जालंधर के फिल्लौर तक पहुंच गया। जिले में आठ दिन में कोरोना ने 18 लोगों को जकड़ लिया। साथ इनके संपर्क में आने की वजह से तीनों जिलों में कुल 25 लोग संक्रमित हो गए थे। जिकल डिस्टेंसिंग, कांटेक्ट ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट से प्रशासन, सेहत विभाग और लोगों ने मिलकर कोरोना की चेन तोड़ दी। 26 मार्च को नवांशहर में अंतिम मामला सामने आया था। पांच अप्रैल को एक मरीज की पहली रिपोर्ट निगेटिव आने के साथ ही कोरोना ने दम तोड़ना शुरू कर दिया।

डेढ़ महीने तक पंजाब के कई इलाकों में घूमे मुंबई के तब्लीगी, पॉजिटिव मिले चारों फिलहाल ठीक
7 अप्रैल को मोगा के गांव चीदा की मस्जिद में ठहरे तब्लीगी जमात से संबंध रखने वाले 13 लोगों में चार की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। बताया जाता है कि मुंबई के बांद्रा इलाके से 12 फरवरी को दिल्ली में तब्लीगी जमात में शामिल होने के लिए आए थे। 16 फरवरी को नई दिल्ली से बठिंडा पहुंच गए। 16 व 17 फरवरी को पूजा वाला मोहल्ले में स्थित मौलवीय मस्जिद में रहे और 16 से 18 फरवरी तक वह गांव बज्जोआना व भगता में गया। इस गांव में वह 22 फरवरी तक रुके रहे। 23 से 28 फरवरी तक इनमें से अजहरुद्दीन मोहम्मद नाम एक व्यक्ति दयालपुरा मिर्जा में 6 दिन रहा। 29 को गांव कोठागुरु का पहुंच गया। इसके बाद वह 3 से 7 मार्च पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के गांव मलूका में करीब 6 दिन तक रहा। 8 मार्च को मल्ला में पहुंचा। 15 मार्च तक वह गांव मल्ला में ही डेरा जमा रखा था और यहीं से वह मोगा जिले के गांव सुखानंद में प्रवेश किया। इस दौरान घूमते हुए वह 22 मार्च को मोगा के गांव सुखानंद पहुंचे और फिर साथ लगते गांव चीदा में स्थित मस्जिद में रुक गए। 4 अप्रैल की रेड में सभी 13 को उठाकर क्वारैंटाइन किया गया, जिनमें से पहले 4 की रिपोर्ट पॉजिटिव जो दो दिन बाद बाकी 9 की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

फतेहगढ़ साहिब में तब्लीगी जमात से जुड़ी औरंगाबाद की दोनों महिलाएं स्वस्थ
औरंगाबाद महाराष्ट्र की रहने वाले 11 लोगों का समूह 10 से 14 मार्च तक दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात में हिस्सा लेकर सानीपुर गांव फतेहगढ़ साहिब लौटा था। यहां यह परिवार 14 से 17 मार्च तक रहा। फिर 17 से 21 मार्च तक ये लोग उच्चा पिंड संघोल में रहे। इसके बाद 21 मार्च से 3 अप्रैल तक खमाणो के गांव मनैली में किसी मस्जिद में रुके थे। जैसे ही इन लोगों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को मिली तो खमाणो के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर इनकी जांच की गई। 5 अप्रैल को 50 से 55 वर्ष के आसपास की दो महिलाएं पॉजिटिव पाई गई तो दोनों को ज्ञान सागर अस्पताल राजपुरा में शिफ्ट कर देने के साथ ही जिले के चार गांवों को गांव सानीपुर, संघोल, खोजेमाजरा और मनैली को सील कर दिया गया था। अब इन दोनों महिलाओं की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

पति की मौत के बाद बेटे के साथ अस्पताल में रही सरपंच, दोनों ठीक हुए
रोपड़ जिले के गांव चतामली के 55 वर्षीय मोहन सिंह की बीते दिनों को कोरोना के संक्रमण से मौत हो चुकी है। उसी के संपर्क में आने के चलते उसकी सरपंच पत्नी और 16 वर्षीय बेटा भी संक्रमण का शिकार हो गए थे। बुधवार को महिला सरपंच की रिपोर्ट निगेटिव आई है, वहीं सिविल सर्जन डॉ. एचएन शर्मा ने बताया कि महिला का 16 वर्षीय बेटा भी ठीक हो चुका है। उन्होंने कहा कि सिर्फ ऐहतियात, सोशल डिस्टेंस, व नियम पालन ही बीमारी का बचाव है।



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