प्रधानमंत्री मोदी ने मिलिंद सोमण से उनकी उम्र पूछी, एक्टर बोले- लोग मुझसे पूछते हैं कि 55 की उम्र में इतना कैसे दौड़ लेते हैं


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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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फिट इंडिया मूवमेंट का एक साल पूरा होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खिलाड़ियों और दूसरे सेलेब्रिटीज से बात कर रहे हैं। मोदी ने एक्टर मिलिंद सोमण से बातचीत में उनके गाने ‘मेड इन इंडिया’ का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने सोमण से उम्र के बारे में पूछा। एक्टर ने कहा “लोग मुझसे कहते हैं कि 55 साल में इतना कैसे दौड़ लेते हो? मैं उनसे कहता हूं कि मेरी मां 81 साल की हैं। वो भी ये सब कर लेती हैं। मेरे दादाजी भी बहुत फिट थे। बैठने से आप कमजोर होते हैं। कोई भी व्यक्ति एक्सरसाइज से 3 किमी से 100 किमी तक दौड़ सकता है।”

मुझे एक्सरसाइज करना पसंद है। जो भी समय मिलता है, उसमें एक्सरसाइज करता रहता हूं। जिम नहीं जाता, मशीनों का इस्तेमाल नहीं करता। मैं 10 फीट के कमरे में फिट रह सकता हूं। मैं जब दौड़ता हूं तो जूते भी नहीं पहनता। आपके पास जो भी है, उसे लेकर भी आप खुद को फिट रख सकते हैं। आप खुद की एक्सरसाइज बना सकते हैं। लोगों को समझ में आना जरूरी है कि फिट रहना है। ये जानना जरूरी है कि आप किस चीज के लिए फिट रहना चाहते हैं मसलन पर्वतारोहण, खेलना या सामान्य जिंदगी के लिए। 40, 50, 60 की उम्र में जिंदगी खत्म नहीं होती। आप नई शुरुआत कर सकते हैं। मन कौर 104 साल की हैं, उन्होंने 90 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया।

लोग अक्सर कहते हैं कि ये मत करो, ये बुरा कर रहे हो, ये गलत होगा। आप इन चीजों को हैंडिल कैसे करते हो। मोदी- हमारे यहां कहा जाता है, – निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय। बिनु पानी-साबुन बिना, निर्मल करे सुहाय। अगर काम स्वच्छ भाव से करते हैं तो ऊर्जा आती है। प्रतिस्पर्धा को हमें टांग खींचना नहीं मानना चाहिए। प्रतिस्पर्धा तंदुरुस्ती की निशानी है। ये तंदुरुस्ती तब होगी, जब खुद से प्रतिस्पर्धा होगी। अपनी लकीर बड़ी करने के बारे में सोचना चाहिए।

रुजुता दिवेकर के साथ बातचीत में मोदी ने हेल्दी फूड के बारे में बताया। रुजुता ने कहा कि आजकल अमेरिका में घी शब्द सबसे ज्यादा गूगल किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि मैं सहजन (मुनगा) के पराठे खाता हूं। हफ्ते में दो बार मां से बात होती है। वो एक ही बात पूछती है- हल्दी ले रहे हो न।

स्वामी शिवध्यानम स्वामी के साथ बातचीत
स्वामी जी- गुरुकुल में छोटी उम्र से बच्चे आकर रहते थे, वहां आवासीय माहौल बनता था। हमारे आश्रम में भी यही पद्धति है। योग मात्र अभ्यास नहीं, जीवन जीने की कला है। आश्रम वो माहौल देता है कि योग की शिक्षाओं को जीवन में उतार सकें। आश्रम में सभी लोग अपना काम स्वयं करते हैं। लड़के-लड़कियां आते हैं, उन्होंने पहले कोई काम किया नहीं होता। जाते वक्ते कहते हैं कि हमारा जीवन बदल गया।

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