बड़ा खुलासा : सुशांत की कंपनी के दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर, बैंक ट्रांजेक्शन की जांच शुरू 


सुशांत सिंह राजपूत की कंपनी के दस्तावेज पर 2020 में कई बार सुशांत के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किये गये। इन बातों के सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां इस पहलु भी तफ्तीश करने में जुटी हैं। वहीं इस नई बात के सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर किसने और क्यों सुशांत की कंपनी के दस्तावेज पर फर्जी हस्ताक्षर किये हैं। कहीं यह भी उनके साथ की गई जालसाजी का एक हिस्सा तो नहीं था। जान-बूझकर सुशांत से फायदा उठाने के लिये उनके नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किये जाने का शक है।

सूत्रों की मानें तो ईडी व अन्य जांच एजेंसियां इस पहलू पर जांच कर रही हैं। इस बाबत उन आरोपितों से भी पूछताछ की जा रही है जिनका नाम इस पूरे प्रकरण में सामने आ रहा है। सुशांत की कंपनी के ट्रांजेक्शन की पड़ताल भी की जा रही है। 

परिवार के साथ बेहद खुश थे सुशांत 
सुशांत सिंह अपने परिवार के साथ बेहद खुश थे। उनकी बहनों से लेकर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी सुशांत के अच्छे रिश्ते थे। उन्हें बदनाम करने के लिये कुछ लोगों ने परिवार के साथ रिश्ते खराब होने के आरोप लगाये। सुशांत का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वे अपने परिवार के साथ हंसते-खेलते दिख रहे हैं। इसके पहले भी उनका भजन गाते एक वीडियो सामने आया था। इन वीडियो के सामने आने के बाद एक और बात साफ हो गयी कि सुशांत किसी तरह के डिप्रेशन की बीमारी से नहीं जूझ रहे थे। 

शुरू से ही सामने आ रही है सबूतों से छेड़छाड़ की बात
इस पूरे प्रकरण में शुरू से ही सबूतों से छेड़छाड़ की बात सामने आ रही थी। सुशांत के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व इस मामले से जुड़ी अन्य चीजों को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे। गौरतलब है कि सुशांत के करीबी भी सबूतों से छेड़छाड़ की बात कह रहे थे।

इंसाफ के लिये पटना में फिर हुआ प्रदर्शन 
सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलवाने के लिये पटना में रविवार को जस्टिस फॉर सुशांत के सदस्यों ने प्रदर्शन किया। राजीवनगर इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान सभी ने आरोपितों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार पर इस मामले की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। जस्टिस फॉर सुशांत के प्रभारी विशाल सिंह राजपूत ने कहा कि जानबूझकर इस मामले को महाराष्ट्र की सरकार ने दबाने की कोशिश की। इसमें बड़े लोगों का नाम सामने आ रहा है लिहाजा वहां की सरकार इस मामले को तूल नहीं देना चाहती थी। 





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