बिहार चुनाव में ‘सेल्फ गोल’ कर रही है कांग्रेस, मणिशंकर अय्यर की तरह शशि थरूर ने भी BJP को दे दिया मुद्दा


कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अनजाने में सही, पर बिहार विधानसभा चुनाव के बीच भाजपा को उसका ‘पसंदीदा’ मुद्दा दे दिया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मशकूर उस्मानी को टिकट देने को लेकर भाजपा पहले ही आक्रामक है। ऐसे में प्रचार के दौरान कांग्रेस को भाजपा-जेडीयू से सवाल पूछने के बजाए अपने ऊपर लग रहे आरोपों से बचाव करने में ज्यादा वक्त देना पड़ सकता है।

शशि थरूर ने पाकिस्तान के बुद्धिजीवियों के साथ चर्चा में कहा है कि भारत में मुसलमानों और उत्तर पूर्व के लोगों के साथ भेदभाव होता है। इस पर भाजपा आक्रामक है। चुनाव में भाजपा की ऐसे बयानों पर नजर रहती है। पांच साल पहले वर्ष 2015 के चुनाव में भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि महागठबंधन जीता तो पाकिस्तान में पटाखे छोड़े जाएंगे। पर उस वक्त जेडीयू के साथ होने से कांग्रेस-राजद की स्थिति मजबूत थी। पर अब स्थितियां बदली हुई हैं। भाजपा ने जिस तरह इन मुद्दों को लपका है, उससे साफ है कि वह इन्हें छोड़ने वाली नहीं है।

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यह पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के बीच भाजपा को इस तरह के मुद्दे थमाएं हो। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव से पहले वरिष्ठ पार्टी नेता मणिशंकर अय्यर के तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को चायवाला कहना सियासी तौर पर भारी पड़ा था। 2017 के गुजरात चुनाव में खुद प्रधानमंत्री ने पाक पर चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया था।

इसके साथ चुनाव में मणिशंकर अय्यर की प्रधानमंत्री की विवादित टिप्पणी ने कमी पूरी कर दी। तमाम कोशिशों और मुद्दों के बावजूद कांग्रेस सत्ता की दहलीज तक नहीं पहुंच पाई। कर्नाटक चुनाव में पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि कांग्रेस पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के धब्बे लगे हैं। इसको भी भाजपा ने चुनाव प्रचार में बड़ा मुद्दा बनाया था। बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पुरानी गलतियों को दोहरा रही है।

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इस बार मणिशंकर अय्यर की जगह शशि थरूर का बयान आया है। बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा कहते हैं कि भाजपा इस तरह के मुद्दों की तलाश में रहती है। अभी तक उनके पास कोई मुद्दा नहीं था। प्रचार के दौरान जनता के सवालों का जवाब देना पड़ रहा था। थरूर के बयान को भाजपा और जेडीयू मुद्दा बनाकर इन सवालों से बचने की कोशिश करेगी।

पार्टी के अंदर यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर चुनाव के बीच कांग्रेस नेता विवादित बयान क्यों देते हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस को किसी भी चुनाव से पहले सभी नेताओं को विवादित बयानों से बचने या इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से परहेज करने की नसीहत करनी चाहिए। क्योंकि, पार्टी कई चुनाव में इस तरह के बयानों से नुकसान उठा चुकी है।



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