बैंकों के लोन की गुणवत्ता को लेकर फिर से चिंता बढ़ने से शैडो बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी की रफ्तार थमी


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नई दिल्ली15 मिनट पहले

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कर्जदाताओं के एएए रेटेड 5 वर्षीय बांड के औसत स्प्रेड्स 4 महीने में पहली बार सितंबर में बढ़ गए, बैंकिंग सिस्टम लिक्विडिटी और आउटस्टैंडिंग डेट वाले दो इंडेक्स कमजोर हुए, जबकि शेयर परफॉर्मेंस इंडेक्स अपनी जगह पर कायम है

  • आरबीआई की राहत पैकेज और टार्गेटेड सपोर्ट के बल पर कुछ महीनों से शैडो बैंक सेक्टर में सुधार दिख रहा था
  • लेकिन एनपीए क्लासिफिकेशन में दी गई ढील को सितंबर में आगे बढ़ाए जाने से रिकवरी थम गई, क्योंकि बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई

कर्जदाताओं पर कोरोना संकट के वास्तविक असर को लेकर फिर से चिंता पैदा होने के कारण देश के संकटग्रस्त शैडो बैंकों में रिकवरी की रफ्तार थम गई है। कर्जदाताओं के एएए रेटेड 5 वर्षीय बांड के औसत स्प्रेड्स 4 महीने में पहली बार सितंबर में बढ़ गए हैं। शैडो बैंक सेक्टर के हेल्थ से जुड़े ब्लूमबर्ग के तीन अन्य इंडेक्स में से बैंकिंग सिस्टम लिक्विडिटी और आउटस्टैंडिंग डेट वाले दो इंडेक्स कमजोर हुए हैं, जबकि शेयर परफॉर्मेंस इंडेक्स अपनी जगह पर कायम है।

कोरोना संकट से इकॉनोमी को बचाने की कोशिशों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा दी गई राहत पैकेज और इस उद्योग के लिए लक्षित सपोर्ट के बल पर कुछ महीनों से शैडो बैंक सेक्टर में सुधार दिख रहा था। लेकिन एनपीए क्लासिफिकेशन नियमों में दी गई ढील को सितंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आगे बढ़ाए जाने के बाद शैडो बैंक सेक्टर में दिख रहा सुधार रुक गया। अदालत के फैसले से बैंकों की संपत्ति को लेकर चिंता बढ़ गई।

देश के लिए मजबूत शैडो बैंकिंग सिस्टम जरूरी

देश के लिए मजबूत शैडो बैंकिंग सिस्टम जरूरी है, क्योंकि ये उन्हें कर्ज देते हैं, जिन्हें बैंक आम तौर पर कर्ज नहीं देना चाहते हैं। शैडो बैंकिंग सेक्टर को सहायता दिया जाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना संकट के कारण सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था में तेजी लाना चाहते हैं। इस कारोबारी साल की पहली तिमाही में दश की जीडीपी में 23.9 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। इतनी तिमाही गिरावट पहले कभी नहीं देखी गई थी।

आने वाले महीनों में कुछ और रिकवरी की संभावना

हाल में क्रेडिट मार्केट को दिए गए कुछ और राहत से आने वाले महीनों में शैडो बैंकिंग सेक्टर में कुछ और रिकवरी दिख सकती है। आरबीआई ने अक्टूबर में कुछ और राहत दी है। आरबीआई ने कहा है कि कॉरपोरेट बांड्स की खरीदारी के लिए वह बैंकों को 1 लाख करोड़ रुपए की फाइनेंसिंग करेगा।



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