भारत के नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर का बकाया कर्ज 322 लाख करोड़ रुपए हुआ, यह आंकड़ा चीन, अमेरिका और जापान की तुलना में कम


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मुंबई3 मिनट पहले

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  • राज्यों और केंद्र का कर्ज सालाना आधार पर 14.3% बढ़ा है, जो पिछले 30 तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर है
  • पहली तिमाही में गैर सरकारी और गैर वित्तीय (NGNF) कर्ज में भी 4.6% बढ़ा है

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घरेलू नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर का बकाया कर्ज 322 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो जीडीपी के 1.6 गुना से भी अधिक है। एनबीएफसी सेक्टर में बकाया कर्ज का यह आंकड़ा अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन, अमेरिका और जापान की तुलना में कम है।

गैर सरकारी और गैर वित्तीय कर्ज में भी 4.6% बढ़ा

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की इकोस्कोप रिपोर्ट (EcoScope report) के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर (NFS) का आउटस्टैंडिंग डेट में पिछली तिमाही के मुकाबले अधिक हुआ है। सालाना आधार पर पहली तिमाही का यह आंकड़ा 9.1% बढ़ा है। इसमें राज्यों और केंद्र का कर्ज भी सालाना आधार पर 14.3% बढ़ा है, जो पिछले 30 तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर है।

सालाना आधार पर पहली तिमाही में गैर सरकारी और गैर वित्तीय (NGNF) कर्ज भी 4.6% बढ़ा है। पहली तिमाही में गैर सरकारी और गैर वित्तीय सेक्टर में हाउसहोल्ड डेट यानी घरेलू कर्ज में भी 6% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2009 में यह आंकड़ा 5.7% के स्तर पर था। इसके अलावा नॉन-फाइनेंशियल डेट ग्रोथ भी 3.7% बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में डेट ग्रोथ कमजोर होकर सिंगल डिजिट में हो जाएगा, जो पिछले दो दशक का निचला स्तर होगा।

गैर सरकारी और गैर वित्तीय कर्ज

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों का बकाया वित्त वर्ष 20 की चौथी तिमाही की तुलना में 5% बढ़ा है। इसके अलावा कॉर्पोरेट बॉन्ड (सीबी) के जरिए कर्ज की लेनदारी 6% भी सालाना आधार पर बढ़ी है। FY21 की पहली तिमाही में विदेशी वाणिज्यिक कर्ज यानी ईसीबी भी 12.5% अधिक हुआ है, जो FY20 की चौथी तिमाही में 12.4% रही थी। इस दौरान एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (एचएफसी) का बकाया कर्ज की दरों में हल्की बढ़त देखने को मिली है। जबकि FY20 की चौथी तिमाही में यह आंकड़ा पहली बार कम हुआ था।

बड़ी इकोनॉमी से कम है बकाया कर्ज

रिपोर्ट में कहा गया है कि आउटस्टैंडिंग डेट के लिहाज से भारत और अन्य देशों की तुलना करने पर, न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था में एनएफएस डेट ग्रोथ अन्य के मुकाबले कम हुआ है, बल्कि पिछली तिमाहियों से थोड़ी बेहतर भी हुई है। भारत का एनएफएस डेट (कर्ज) वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में 167.30% हो गया है, जो एक साल पहले समान तिमाही में 152.4% था। इसमें 15% का उछाल देखा गया है।

दूसरी ओर अमेरिका में यह ग्रोथ 29%, ब्रिटेन में 31%, जापान में 26% और चीन में 21% की रही। यानी भारत में नॉन-फाइनेंशियल सेक्टर की डेट ग्रोथ अमेरिकी, जापान, चीन और ब्रिटेन के मुकाबले कम हुआ है।

डेट ग्रोथ की बड़ी वजह क्रेडिट गारंटी योजना

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, एनएफएस डेट FY21 की दूसरी तिमाही में बढ़ सकती है। डेट ग्रोथ की बड़ी वजह इस साल मई में सरकार की क्रेडिट गारंटी योजना की घोषणा है। दूसरी तिमाही में इनिशियल डिस्बर्समेंट ट्रेंड में एचडीएफसी बैंक और एचडीएफसी लिमिटेड जैसे चुनिंदा लेंडर्स ने पहली तिमाही के समान मजबूत सुधार के संकेत दिए हैं।

हालांकि, लेंडर्स के मजबूत प्रदर्शन के चलते कंपनियों के शेयर घरेलू मार्केट में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है। अच्छे प्रदर्शन के कारण दूसरी तिमाही में गैर सरकारी वित्तीय सेक्टर का क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार का अनुमान है।



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