राइट्स इश्यू के जरिए 500 करोड़ रुपए जुटाएगा लक्ष्मी विलास बैंक, नकदी संकट से मुक्ति में मदद मिलेगी


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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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लक्ष्मी विलास बैंक इस साल विलय की कई कोशिश कर चुका है लेकिन आरबीआई के कारण यह विफल हो चुकी हैं।

  • बैंक के बोर्ड ने फंड जुटाने को मंजूरी दी
  • डायरेक्टर्स की नियुक्ति पर हो चुका है विवाद

नकदी संकट का सामना कर रहे लक्ष्मी विलास बैंक की गुरुवार को बोर्ड बैठक हुए। इस बैठक में बोर्ड ने राइट्स इश्यू के जरिए 500 करोड़ रुपए का राशि जुटाने के प्रस्ताव के मंजूरी दे दी। इस राशि के जरिए बैंक नकदी के संकट को दूर करेगा। बैंक ने रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है।

क्लिक्स ग्रुप ने दिया है विलय का प्रस्ताव

पिछले सप्ताह नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) क्लिक्स ग्रुप ने लक्ष्मी विलास बैंक के साथ विलय का प्रस्ताव पेश किया था। यदि यह विलय होता है तो बैंक की नेटवर्थ 3100 करोड़ रुपए हो जाएगी। अभी बैंक की नेटवर्थ 1200 करोड़ रुपए है। क्लिक्स कैपिटल की इस समय नेटवर्थ 1900 करोड़ रुपए है। विलय के बाद यह नेटवर्थ लक्ष्मी विलास बैंक के पास आ जाएगी। इससे पहले क्लिक्स कैपिटल और लक्ष्मी विलास बैंक के बीच विलय को लेकर जून में गैर-निविदा समझौता हुआ था। 15 सितंबर को भी दोनों ने संभावित विलय के जारी रहने की बात कही थी।

पहले भी विलय की कोशिश कर चुका है बैंक

लक्ष्मी विलास बैंक पहले भी विलय की कोशिश कर चुका है। बैंक ने श्रेई कैपिटल और इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस के साथ के साथ विलय की योजना बनाई थी। लेकिन आरबीआई विलय के इन दोनों प्रस्तावों को कुछ निश्चित मुद्दों के कारण रद्द कर चुका है। गुरुवार को लक्ष्मी विलास बैंक का शेयर बीएसई में 4.10 फीसदी गिरकर 17.55 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुआ है।

7 डायरेक्टर्स की नियुक्ति के खिलाफ वोट कर चुके हैं शेयरहोल्डर

बीते 25 सितंबर को लक्ष्मी विलास बैंक की वार्षिक आम सभा हुई थी। इसमें बैंक के शेयरहोल्डर्स ने 7 डायरेक्टर्स की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था। इसमें बैंक के सीईओ एस सुंदर, प्रमोटर केआर प्रदीप और एन साईप्रसाद भी शामिल थे। इसके बाद आरबीआई ने बैंक का प्रबंधन अपने हाथ में लिया था। बाद में आरबीआई ने बैंक के संचालन के तीन सदस्यीय टीम नियुक्त की थी। इसमें मीता माखन को चेयरमैन और शक्ति सिन्हा-सतीश कुमार कालरा को सदस्य बनाया गया था।



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