रेवेन्यू शॉर्टफॉल की भरपाई के मुद्दे पर आज फिर बैठक, गैर-बीजेपी राज्य कर सकते हैं हंगामा


नई दिल्ली27 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

5 अक्टूबर को केंद्र ने पहले विकल्प के तहत बाजार से उधार लेने की राशि को 97 हजार करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.1 लाख करोड़ रुपए कर दिया था। (फाइल फोटो)

  • 5 अक्टूबर को आयोजित बैठक में नहीं बन पाई थी सहमति
  • केंद्र ने पहले विकल्प के तहत उधार की राशि को बढ़ाया

वित्त वर्ष 2021 में जीएसटी रेवेन्यू शॉर्टफॉल के मुद्दे पर आज फिर जीएसटी काउंसिल की बैठक होने जा रही है। शॉर्ट रेवेन्यू की भरपाई के लिए केंद्र ने दो विकल्प दिए हैं। लेकिन गैर-बीजेपी राज्य इन विकल्पों का विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह राज्य इस मुद्दे पर बैठक में हंगामा कर सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि गैर-बीजेपी राज्य इन विकल्पों को लेकर वोटिंग की मांग भी कर सकते हैं।

चालू वित्त वर्ष में 2.35 लाख करोड़ का रेवेन्यू शॉर्टफॉल

27 अगस्त को हुई काउंसिल की बैठक में चालू वित्त वर्ष में जीएसटी रेवेन्यू में 2.35 लाख करोड़ रुपए के शॉर्टफॉल का अनुमान जताया गया था। इसमें 97 हजार करोड़ रुपए जीएसटी इम्प्लीमेंटेशन और 1.38 लाख करोड़ रुपए राज्यों के रेवेन्यू के शामिल हैं। इस रेवेन्यू शॉर्टफॉल की भरपाई के लिए केंद्र ने दो विकल्प दिए थे। पहले विकल्प के तहत राज्य आरबीआई से विशेष विंडो के तहत 97 हजार करोड़ रुपए उधार ले सकते हैं। दूसरे विकल्प के तहत केंद्र 2.35 लाख करोड़ रुपए बाजार से उधार लेकर राज्यों की दे।

उधार वाले विकल्प पर गैर-बीजेपी राज्यों का विरोध

जानकारी के मुताबिक, 21 राज्यों ने 97 हजार करोड़ रुपए उधार लेने पर सहमति जता दी है। इसमें से अधिकांश राज्यों में बीजेपी या उसके सहयोगियों की सरकार है। वहीं गैर-बीजेपी राज्य इस विकल्प का विरोध कर रहे हैं। इसमें पश्चिम बंगाल, दिल्ली, केरल, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु शामिल हैं। यह राज्य चाहते हैं कि केंद्र सरकार उधार लेकर रेवेन्यू शॉर्टफॉल की भरपाई करे।

2022 के बाद भी जारी रहेगी कंपनसेशन सेस की वसूली

इससे पहले 5 अक्टूबर को भी रेवेन्यू शॉर्टफॉल की भरपाई के मुद्दे पर बैठक हुई थी। इस बैठक में राज्यों के बीच कोई सहमति नहीं बना पाई थी। हालांकि, सभी राज्य और केंद्र जीएसटी कंपनसेशन सेस की वसूली को 2022 से आगे तक बढ़ाने पर सहमत हो गई थे। इसके अलावा केंद्र ने पहले विकल्प के तहत बाजार से उधार लेने की राशि को 97 हजार करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.1 लाख करोड़ रुपए कर दिया था।



Source link

Be the first to comment

Leave a Reply