वेतन के लिए हिंदू राव अस्पताल में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन, सत्येंद्र जैन बोले- कोविड-19 मरीज दिल्ली सरकार के अस्पतालों में किए जाएंगे शिफ्ट


उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) के हिंदू राव अस्पताल (Hindu Rao Hospital) के रेजिडेंट डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने चार महीने से वेतन न देने का आरोप लगाते हुए शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन किया। हाथों में पोस्टर-बैनर लिए प्रदर्शन में शामिल हुए सैकड़ों कर्मचारियों ने दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि COVID फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह से व्यवहार किया जा रहा है। एमसीडी दिल्ली सरकार और दिल्ली सरकार एमसीडी को दोषी ठहरा रही है। हम इस राजनीतिक फुटबॉल में पीड़ित बनकर रह गए हैं। 

अस्पताल के कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के इस संकट में अपनी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों को चार महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में उन्हें परिवार चलाने में अनेक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के कहा कि MCD के द्वारा चलाए जाने वाले हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ ने हड़ताल के लिए नोटिस दिया है, वहां के कोविड मरीजों को हमने दिल्ली सरकार के अस्पतालों में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। सत्येंद्र जैन ने कहा कि अगर MCD से कस्तूरबा अस्पताल और हिंदू राव अस्पताल नहीं चल रहे हैं तो दिल्ली सरकार को सौंप दें। हम चला लेंगे और सैलरी भी दे देंगे।

हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों को चार महीने से नहीं मिला वेतन

गौरतलब है कि हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने गुरुवार को अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को लिखे अपने पत्र में 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी।जानकारी के अनुसार, चार महीने से वेतन न मिलने पर हिंदू राव अस्पताल की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर इस संबंध में तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की थी।

RDA ने कहा कि अगर चार महीनों का बकाया वेतन उन्हें जल्द नहीं मिला तो हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर अगले 48 घंटे में कोरोना वार्ड से भी अपनी सेवाएं समाप्त कर देंगे और उनका प्रदर्शन ऐसे ही जारी रहेगा। 

बता दें कि पिछले कई दिनों से सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर, नर्स प्रदर्शन कर रहे हैं। अलग-अलग अस्पतालों के आरडीए भी पत्र लिखकर वेतन देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, इसीलिए अब डॉक्टरों ने प्रतीकात्मक तौर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है।





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