वेदांता की डिलिस्टिंग के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है एलआईसी, 320 रुपए प्रति शेयर पर एलआईसी ने किया ऑफर


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मुंबईएक घंटा पहले

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वेदांता लिमिटेड कंपनी मूलरूप से अनिल अग्रवाल के ओनरशिप की है। कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 51.06% है।

  • कंपनी को 134 करोड शेयरों के मुकाबले 137 करोड़ शेयरों पर बिड मिली है
  • कंपनी भुगतान के लिए 2.5 बिलियन डॉलर की रकम कर्ज लेगी

वेदांता लिमिटेड शेयर बाजार से अपने शेयरों को डिलिस्ट करने जा रही है। आज यानी शुक्रवार को प्रक्रिया का आखिरी दिन है। लेकिन अल्युमिनियम सहित अन्य सेक्टर्स में कारोबार करनेवाली कंपनी वेदांता के लिए यह प्रक्रिया थोड़ी मुश्किल होती जा रही है।

क्योंकि 125.2 करोड़ शेयरों की टेंडरिंग मिली है। इसके लिए कंपनी को कुल 24 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान करना होगा। जो फिलहाल संभव होता नहीं दिख रहा है। कंपनी ने डिलिस्टिंग का फैसला ज्यादा कर्ज और ब्याज के बोझ के कारण लिया है।

137 करोड़ शेयरों पर मिली बिड

बीएसई द्वारा जारी डेटा के अनुसार कंपनी को 134 करोड शेयरों के मुकाबले 137 करोड़ शेयरों पर बिड मिली है। जबकि कंपनी को डिलिस्ट होने के लिए 134 करोड़ शेयरों की आवश्यकता है। 137 करोड़ शेयरों में 69 करोड़ शेयर 155 रुपए प्रति शेयर की कीमत पर, 21 करोड़ शेयर 160 रुपए प्रति शेयर की प्राइस पर और 31.80 करोड़ शेयर 320 रुपए प्रति शेयर की कीमत पर टेंडरिंग हुई है।

बड़ी रकम का भुगतान

इससे पहले वेदांता ने 87.25 रुपए प्रति शेयर के भाव पर डिलिस्ट का ऑफर दिया था। इसके लिए कंपनी को 11 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ता, तब शेयरों का भाव 140 रुपए था। जो आज यानी शुक्रवार को भी 120 रुपए प्रति शेयर पर बंद हुआ है। ऐसे में निवेशक इस भाव पर राजी नहीं होंगे।

अब अगर कंपनी आज के बंद भाव पर भी डिलिस्ट विचार करती है तो उसको 135 करोड़ शेयरों के लिए कुल 16.20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ेगा। हालांकि इस भाव पर भी कंपनी के शेयर का डिलिस्ट होना भी मुश्किल है। हालांकि कंपनी भुगतान के लिए 2.5 बिलियन डॉलर की रकम कर्ज लेगी। इसके लिए जेपी मोर्गन और बार्कलेज जैसे ग्लोबल बैंकों से बातचीत भी जारी है।

एचएनआई से मुश्किल

लेकिन डिलिस्टिंग प्रक्रिया में सबसे बड़ी समस्या संस्थागत निवेशकों से होगी। उदाहरण के तौर पर लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (एलआईसी) को देखें तो वेदांता में एलआईसी की हिस्सेदारी 6.37% है। कंपनी के एमडी विपिन आनंद का कहना है कि वेदांता की डिलिस्टिंग के लिए 320 रुपए प्रति शेयर एक फेयर वैल्यू है। उन्होंने कहा कि एलआईसी 320 रुपए के नीचे शेयर टेंडर नहीं करेगी।

कंपनी में हिस्सेदारी

इसके अलावा कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 51.06% है। यानी 1,76,43,26,080 इक्विटी शेयर्स है। जबकि पब्लिक के पास 48.94% शेयर होल्डिंग्स है। यानी 169,10,90,351 इक्विटी शेयर्स हैं। इसमें म्यूचुअल फंड्स (MF) की 31 स्कीम्स के पास 10.91% हिस्सेदारी है। 506 एफआईआई (FII) के पास 15.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। व्यक्तिगत निवेशकों के पास 7.54% की हिस्सेदारी है। इसके अलावा आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इक्विटी आर्बिटेज फंड की 5.02% और सिटी बैंक की 4.38% हिस्सेदारी है। एचडीएफसी इंफ्रा फंड की 2.47% और एसबीआई ऑर्बिटेज फंड की 1.12% हिस्सेदारी है।

क्या है नियम

सेबी के नियमों के मुताबिक 90 प्रतिशत शेयर धारकों का कंसेंट चाहिए। कंपनी को माइनॉरिटी शेयर होल्डर्स की अनुमति चाहिए। इसके लिए उसे स्पेशल रिजोल्यूशन पोस्टल बैलेट के तहत लाना होगा। इसके लिए दो टाइम वोट चाहिए। हालांकि कंपनी के बोर्ड ने उसे डिलिस्ट की मंजूरी दे दी है। वेदांता को डिलिस्ट के लिए भारत और अमेरिका के रेगुलेटर्स से मंजूरी चाहिए। अमेरिका से इसलिए क्योंकि वहां उसका एडीआर लिस्टेड है।

लंदन स्टॉक एक्सचेंज से डिलिस्ट

वेदांता लिमिटेड कंपनी मूलरूप से अनिल अग्रवाल के ओनरशिप की है। 2018 में यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज से डिलिस्ट हो चुकी है। अनिल अग्रवाल डिलिस्ट करके इसे प्राइवेट कंपनी बनाना चाहते हैं।

प्रमोटर्स के पास क्या है विकल्प

अब प्रमोटर्स के पास दो विकल्प है, पहला कि कंपनी 26 हजार करोड़ रुपए का भुगतान करे और दूसरा, कंपनी की डिलिस्टिंग का फैसला वापस ले। हालांकि प्रमोटर्स ने 2.2 अरब डॉलर की रकम के भुगतान के लिए कर्ज लेने की तैयारी में है, जो वर्तमान की भुगतान वाली रकम से काफी कम है। अब अगर कंपनी ऐसा करने में असफल रहती है, तो यह डिलिस्टिंग प्रक्रिया फेल हो जाएगी।

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