श्याम रजक को राजद में जाने का चाहिए था मुद्दा, आज पद और जदयू से इस्तीफा देंगे उद्योग मंत्री


उद्योग मंत्री श्याम रजक को लेकर बीते कई महीनों से चल रही चर्चाओं पर विराम लगने जा रहा है। वे सोमवार को जदयू छोड़ राजद का दामन थाम सकते हैं। रजक काफी समय से अपने टिकट को लेकर आशंकित चल रहे थे। गाहे-बगाहे उनके पाला बदलने की चर्चाएं भी जोर पकड़ती रही हैं। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ने के लिए अपने ही विभाग में खुद की उपेक्षा किए जाने की बात को मुद्दा बनाया है।

श्याम रजक मंत्री बनने के बाद भी वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बहुत निश्चिंत नहीं हो पा रहे थे। करीब छह महीने से वे अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा चला रहे थे। इसमें सभी दलों के दलित विधायकों को जोड़कर उन्होंने इसके अगुवा के रूप में खुद को प्रदर्शित किया। हालांकि तब भी राजद के अनुसूचित विधायकों ने उनकी कप्तानी स्वीकारने से मना कर दिया था। फिर सरकार ने औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 की समीक्षा की। बदलाव के मसौदे को लेकर भी उद्योग मंत्री संतुष्ट नहीं थे।

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फिर वित्त विभाग के प्रधान सचिव डा. एस. सिद्धार्थ को उद्योग विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। यह बात भी रजक को नागवार गुजरी। डा. सिद्धार्थ ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद विभाग के कार्यों का अपने और उद्योग सचिव नर्मदेश्वर लाल के बीच बंटवारा कर दिया। इसे उन्होंने मुद्दा बनाते हुए इस कार्य बंटवारा आदेश को रद्द करते हुए इसको कार्यपालक नियमावली का उल्लंघन करार दिया। इस मामले की फाइल उन्होंने मुख्य सचिव के माध्यम से मुख्यमंत्री को निर्णय के लिए भेज दिया। फिर उन्होंने एक पीत पत्र भी लिखा। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रधान सचिव स्तर से भी नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसी बात को मुद्दा बनाते हुए श्याम रजक ने राजद का दामन थामने का फैसला कर लिया।

श्याम रजक वर्ष 2009 में राजद छोड़कर जदयू में आए थे। तब उन्होंने राजद में अपने अपमान की बात कही थी। उसके बाद 2010 में जदयू की टिकट पर फुलवारी शरीफ सीट से विधानसभा चुनाव जीते और नीतीश सरकार में मंत्री बने। 2015 में फिर इसी सीट से जदयू के टिकट पर जीते मगर महागठबंधन की सरकार में मंत्री नहीं बन सके। 2019 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में एक बार फिर मुख्यमंत्री ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाकर उद्योग विभाग की कमान सौंपी थी।

राजद में मशहूर थी राम-श्याम की जोड़ी
श्याम रजक पहले भी राजद में रहे हैं। उस दौर में वहां रामकृपाल यादव और श्याम रजक की जोड़ी राम-श्याम के नाम से मशहूर थी। राजद सुप्रीम लालू प्रसाद के यह लोग खासे करीबी माने जाते थे।

कार्यपालिका नियमावली में कार्य आवंटन का अधिकार मेरा है। मुझे बाईपास करके प्रधान सचिव ने कार्य आवंटन कर दिया। आदेश रद्द करते हुए इसे मुख्यमंत्री को भेजा था। पीत पत्र भी लिखा मगर कोई जवाब नहीं आया। अपने मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं करूंगा। कल जदयू से इस्तीफा दूंगा।
– श्याम रजक





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