संजय राउत बोले- टीआरपी घोटाले को बेनकाब करना मुंबई पुलिस की बदले की कार्रवाई नहीं


शिवसेना नेता संजय राउत ने शुक्रवार को उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि मुंबई पुलिस ने टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) में छेड़छाड़ करने वाले रैकेट का पर्दाफाश बदले की कार्रवाई के तहत किया।  उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ” मुंबई पुलिस ने इस घोटाले का खुलासा करने के लिए साहसिक कदम उठाया है। यह तो महज शुरुआत है…सबकुछ जल्द सामने आ जाएगा। 

राउत ने पूछा, ”यह घोटाला करीब 30 हजार करोड़ रुपये का है और लोग चुप क्यो हैं? इन सब के पीछे कौन है? यह पैसा कहां से आया?  उन्होंने कहा, ” मुंबई पुलिस पेशेवर है। कोई कदम बदले या विद्वेष की भावना से नहीं उठाया जाएगा, लेकिन जिस तरह से चैनलों ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार और ठाकरे परिवार को निशाना बनाया, क्या वह विद्वेषपूर्ण नहीं है? 

राउत ने लेखिका शोभा देशपांडे को बधाई दी जिन्होंने शहर के स्थानीय आभूषण विक्रेता द्वारा मराठी में बात करने से इनकार करने पर विरोध किया था। उन्होंने कहा कि वह मराठी भाषा के सम्मान के साथ खड़ी हुई हैं। 

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने ‘टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (टीआरपी) से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा करते हुए गुरुवार को कहा कि इस मामले के संबंध में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।  टीआरपी से यह पता चलता है कि कौन सा टीवी कार्यक्रम सबसे ज्यादा देखा गया। इससे दर्शकों की पसंद और किसी चैनल की लोकप्रियता का भी पता चलता है। 

मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि रिपब्लिक टीवी चैनल भी टीआरपी गिरोह में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस चैनल द्वारा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की गई थी। सिंह ने कहा कि टीआरपी गिरोह का पर्दाफाश करने वाली मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने दो मराठी चैनलों के मालिकों को दर्शकों की संख्या की रेटिंग से छेड़छाड़ करने के लिए गिरफ्तार किया है। 

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि टीआरपी का पता लगाने वाली एजेंसी हंसा के दो पूर्व कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि टीआरपी गिरोह में रिपब्लिक टीवी चैनल भी शामिल है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा चाहे वह निदेशक, प्रवर्तक हो या चैनल का कोई अन्य कर्मचारी। 

रिपब्लिक टीवी ने एक बयान जारी कर सिंह के आरोपों को खारिज किया है। चैनल के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी ने कहा कि मुंबई पुलिस आयुक्त ने रिपब्लिक टीवी के विरुद्ध गलत आरोप लगाए हैं क्योंकि चैनल ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। 

गोस्वामी ने कहा कि चैनल मुंबई पुलिस आयुक्त के विरुद्ध आपराधिक मानहानि का मुकदमा करेगा। उन्होंने कहा कि बीएआरसी ने एक भी शिकायत में रिपब्लिक टीवी का नाम नहीं लिया है। गोस्वामी ने कहा कि सिंह को माफी मांगनी चाहिए और अदालत में मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 

सिंह ने कहा कि इन चैनलों के बैंक खातों की जांच भी की जा रही है और टीआरपी गिरोह के लिए जिम्मेदार लोगों को पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए तलब किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “विज्ञापन देने वाले इन टीआरपी रेटिंग के आधार पर इन चैनलों पर विज्ञापन प्रसारित करने के लिए पैसे देते थे और यह खेल हजारों करोड़ रुपये का है।” 

सिंह ने कहा कि छेड़छाड़ की हुई टीआरपी रेटिंग से विज्ञापन देने वालों को दर्शकों की गलत संख्या बताई जाती थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार टीआरपी के गलत आंकड़े दिखाकर सैकड़ों करोड़ रुपये का चूना लगाया जा रहा था। गोपनीय तरीके से कुछ घरों में टीवी चैनल के दर्शकों के आधार पर टीआरपी की गणना की जाती थी। सिंह ने कहा कि गिरोह में शामिल लोग इन घरों के लोगों को घूस देकर उनसे कहते थे कि वे टीवी पर कुछ चैनल चलाकर छोड़ दें, भले ही वह उसे देख न रहे हों, या घर पर न हों। 

उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च कॉउंसिल (बीएआरसी), भारत में टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है और इस मामले के संबंध में उनके अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा कि टीआरपी को मापने के लिए मुंबई में दो हजार बैरोमीटर लगाए गए हैं। सिंह ने कहा कि बीएआरसी ने ‘हंसा नामक एजेंसी को इन बैरोमीटर पर नजर रखने का ठेका दिया था। 

पुलिस आयुक्त ने कहा कि दोनों चैनल के मालिकों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें शुक्रवार तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत गिरफ्तार किया गया है। सिंह ने कहा, “हमें शक है कि यदि यह मुंबई में हो सकता है तो देश के अन्य भागों में भी हो सकता है।” 

बीएआरसी, टीवी के दर्शकों की संख्या बताने के लिए सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध प्रणाली के गठन और निगरानी का काम करता है और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के दिशा निर्देशों से बंधा होता है। सिंह ने कहा कि हंसा ने टीआरपी गिरोह के विरुद्ध एक शिकायत दर्ज की जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। 

 



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