हाथरस की घटना के बाद गृह मंत्रालय ने महिला सुरक्षा के लिए जारी की राज्यों को सलाह, कहा- सख्ती से हो इसका पालन


केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिए एक एडवायजरी जारी की है जिसमें कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में पुलिस सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। शासन के आदेश के अनुसार, पुलिस के लिए “आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 154 की धारा-उप (1) के तहत संज्ञेय अपराध के मामले में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है।”
कानून के तहत रेप या यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करने का अधिकार प्राप्त है जबकि अपराध उनके थाना क्षेत्र में न हुआ हो तब भी।सरकार ने ऐसी स्थिति के लिए डात्मक एन केस को अनिवार्य कर दिया है। जब कोई अधिकारी अपराधों के संबंध में एफआईआर दर्ज करने में नाकामयाब रहता है। भारतीय दंड संहिता 1860 (आईपीसी) की धारा 166 ए (सी) एक सरकारी अधिकारी को धारा 326 ए, धारा 326 बी, धारा 354, धारा 354 बी, धारा 370, धारा 370 के तहत संज्ञेय अपराध के संबंध में एफआईआर दर्ज करने में विफलता के लिए दंड का प्रावधान करती है।

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उत्तर प्रदेश के हाथरस में चार सवर्णों द्वारा कथित सामूहिक बलात्कार के बाद 19 वर्षीय की मौत के कुछ दिनों बाद यह सामने आया है। अपराध की क्रूरता ने विपक्षी दलों और महिला कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को गति प्रदान कर दी।



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