9 महीने में दुनियाभर के श्रमिकों की आय 3.5 लाख करोड़ डॉलर घट गई : अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन


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नई दिल्ली9 मिनट पहले

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ग्लोबल वर्किंग टाइम में दिसंबर 2019 तिमाही के मुकाबले जून 2020 तिमाही में 17.3% का नुकसान, यह 49.5 करोड़ फुल टाइम जॉब के बराबर है

  • आईएलओ ने कहा कि इस साल की पहली 3 तिमाहियों में पूरी दुनिया में श्रमिकों की आय 10.7% घटी
  • सबसे ज्यादा बुरा असर निम्न-मध्य आय वाले देशों में दिखा, जहां श्रमिकों की आय 15.1% घट गई

कोरोनावायरस महामारी के कारण इस साल की पहली तीन तिमाहियों (जनवरी-सितंबर) में दुनियाभर के श्रमिकों की आय पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले अनुमानित 10.7 फीसदी या 3.5 लाख करोड़ डॉलर घट गई। इस आंकड़े में विभिन्न देशों में राहत पैकेज के द्वारा दिए गए इनकम सपोर्ट को शामिल नहीं किया गया है। यह बात अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने बुधवार को कही।

आईएलओ ने श्रम की दुनिया पर कोरोनावायरस महामारी के असर को लेकर अपने ताजा अनुमान में कहा कि महामारी के कारण काम के घंटे में भारी नुकसान होने के कारण पूरी दुनिया में श्रमिकों की आय में भारी गिरावट आई है। आइएलओ ने कहा कि सबसे ज्यादा असर निम्न-मध्य आय वाले देशों पर दिखा, जहां श्रमिकों की आय में 15.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। क्षेत्र के लिहाज से सबसे बुरा असर अमेरिकी देशों पर पड़ा, जहां श्रमिकों की आय 12.1 फीसदी घट गई।

ग्लोबल वर्किंग टाइम लॉस पहले के अनुमान से काफी ज्यादा

आईएलओ मॉनीटर : कोविड-19 एंड एंड द वर्ल्ड ऑफ वर्क (छठा संस्करण) में यह भी कहा गया है कि दुनियाभर में काम के घंटे में जितने की कमी आई है, वह पहले के अनुमान से काफी ज्यादा है। दिसंबर 2019 तिमाही के मुकाबले इस साल जून तिमाही में ग्लोबल वर्किंग टाइम के नुकसान का संशोधित अनुमान 17.3 फीसदी है, जो 49.5 करोड़ फुल टाइम जॉब के बराबर है। सितंबर तिमाही में वर्किंग टाइम लॉस 12.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जो 34.5 करोड़ फुल टाइम जॉब के बराबर है।

कारोबारी गतिविधियां बंद होने से काम के घंटे का नुकसान हुआ

चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2020) में ग्लोबल वर्किंग टाइम लॉस सालाना आधार पर 8.6 फीसदी या 24.5 करोड़ फुल टाइम जॉब के बराबर रहने का अनुमान है। काम के घंटे में क्यों भारी गिरावट आई? इस बारे में आईएलओ ने कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में (खासकर अनौपचारिक रोजगार के क्षेत्र में) किसी भी पिछले संकट के मुकाबले श्रमिक बहुत ज्यादा प्रभावित हुए हैं। आईएलओ ने साथ ही कहा कि काम के घंटे में जो गिरावट आई है, उसके लिए बेरोजगारी कम और कारोबारी गतिविधियों में गिरावट ज्यादा जिम्मेदार है।

94% कामगार ऐसे देशों में हैं, जहां कार्यस्थलों पर किसी-न-किसी प्रकार का प्रतिबंध लगा हुआ है

आईएलओ ने कहा कि 94 फीसदी कामगार ऐसे देशों में हैं, जहां कार्यस्थलों पर किसी-न-किसी प्रकार का प्रतिबंध लगा हुआ है। 32 फीसदी कामगार ऐसे देशों में हैं, जहां आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर बाकी सभी कारोबारी गतिविधियों पर रोक लगी हुई है। आईएलओ के महानिदेशक गाय राइडर ने जेनेवा में कहा कि विकासशील देशों में कामगारों के काम के घंटे में 15 फीसदी से ज्यादा गिरावट हुई है।

वित्तीय राहत नहीं दिए जाते, तो जून तिमाही में वर्किंग आवर लॉस 28% होता, न कि 17.3%

राइडर ने कहा कि सरकारों ने यदि वित्तीय राहत नहीं दिए होते, तो अप्रैल-जून तिमाही में वर्किंग आवर लॉस 28 फीसदी होता, न कि 17.3 फीसदी। वर्किंग टाइम लॉस्ट के मुकाबले उच्च आय वाले देशों में दिए गए राहत पैकेज की बराबरी करने के लिए विकासशील देशों को 982 अरब डॉलर का और राहत देना पड़ेगा। इसके तहत निम्न आय वाले देशों को 45 अरब डॉलर और निम्न-मध्य आय वाले देशों को 937 अरब डॉलर का और राहत पैकेज देना पड़ेगा।

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