Fiscal deficit expected to touch 7 percent of GDP in 2020-21: Brickwork Ratings | चालू वित्त वर्ष में जीडीपी का 7% तक हो सकता है राजकोषीय घाटा, कम कमाई और ज्यादा खर्च से बढ़ेगी मुसीबत


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नई दिल्ली41 मिनट पहले

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एजेंसी का कहना है कि यदि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक रहती है तो सरकार को फंड की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

  • पहली तिमाही में इनकम टैक्स रेवेन्यू 30.5% और जीएसटी कलेक्शन 34% गिरा
  • आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत प्रोत्साहन पैकेज के कारण खर्च 13.1% बढ़ा

वित्त वर्ष 2020-21 में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) जीडीपी के 7 फीसदी तक हो सकता है। बजट में इसके 3.5 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया गया था। रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने यह अनुमान जताया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों पर लॉकडाउन के प्रभाव के कारण चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में केंद्र सरकार का रेवेन्यू कलेक्शन तेजी से गिरा है।

पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले कम कलेक्शन

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (सीजीए) की ओर से जारी डाटा के मुताबिक, चाल वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले केंद्र सरकार का रेवेन्यू कलेक्शन काफी कम रहा है। डाटा के मुताबिक, पहली तिमाही में इनकम टैक्स रेवेन्यू (पर्सनल इनकम टैक्स और कॉरपोरेट इनकम टैक्स) 30.5 फीसदी और जीएसटी (सीजीएसटी+आईजीएसटी+यूटीजीएसटी) 34 फीसदी कम रहा है।

प्रोत्साहन पैकेज के कारण खर्च में भारी बढ़ोतरी

वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में केंद्र सरकार का खर्च 13.1 फीसदी बढ़ गया है। कोरोनामहामारी से लोगों को बचाने और आजीविका के लिए आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत प्रोत्साहन पैकेज देने के कारण खर्च में बढ़ोतरी हुई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि पहली तिमाही में कुल राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 83 फीसदी तक पहुंच गया है।

तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी का अनुमान

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी आ सकती है। एजेंसी का कहना है कि कारोबारी गतिविधियों के दोबारा शुरू होने के शुरुआती संकेतों से हम उम्मीद कर सकते हैं कि रेवेन्यू कलेक्शन तीसरी तिमाही के अंत में प्री-कोविड स्तर तक पहुंच सकता है। एजेंसी ने फेस्टिव सीजन में खपत बढ़ने की उम्मीद जताई है।

लंबे समय तक यही स्थिति रही तो फंड की कमी होगी

एजेंसी का कहना है कि यदि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक रहती है तो सरकार को फंड की कमी का सामना करना पड़ सकता है। फंड की कमी के कारण सरकार बजट की घोषणाओं को पूरा करने में चूक सकती है। सरकार की ओर से घोषित 12 लाख करोड़ रुपए के कर्ज के बावजूद फंड की कमी बनी रहेगी। इससे सरकार को कैपिटल एक्सपेंडेचर और पोषित मनरेगा-नेशनल हेल्थ मिशन जैसी योजनाओं भारी कटौती करने पड़ सकती है।

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