Franklin Templeton MF’s closed schemes receive Rs 1,498 cr in two weeks | फ्रैंकलिन टेंपल्टन को दो सप्ताह में बंद स्कीमों के 1498 करोड़ रुपए मिले, अब तक 6486 करोड़ की रिकवरी


नई दिल्ली16 मिनट पहले

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कानूनी विवाद के कारण फ्रैंकलिन टेंपल्टन अभी अपने ग्राहकों को निवेश राशि का भुगतान नहीं कर सकता है।

  • फ्रैंकलिन टेंपल्टन ने 23 अप्रैल को 6 स्कीम्स को बंद कर दिया था
  • दो स्कीम्स में कैश सरप्लस हुआ, ग्राहकों को भुगतान में होगी देरी

फ्रैंकलिन टेंपल्टन म्यूचुअल फंड ने गुरुवार को कहा कि उसे बीते दो सप्ताहों में अपनी बंद 6 स्कीमों की 1498 करोड़ रुपए की राशि मिली है। यह राशि मैच्योरिटी, प्री-पेमेंट्स और कूपन पेमेंट के जरिए मिली है। फ्रैंकलिन टेंपल्टन के मुताबिक, 24 अप्रैल से अब तक बंद हो चुकी स्कीम्स से कुल 6486 करोड़ रुपए की राशि मिल चुकी है। कानूनी अनिश्चितता और बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी के अभाव में फ्रैंकलिन टेंपल्टन ने इन 6 स्कीम्स को 23 अप्रैल को बंद कर दिया था।

6 स्कीम्स का कुल एयूएम 25 हजार करोड़ के करीब

फैंकलिन टेंपल्टन की ओर से बंद की गई सभी 6 स्कीम्स के असेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 25 हजार करोड़ रुपए के आसपास का होने का अनुमान जताया जा रहा है। म्यूचुअल फंड हाउस की ओर से फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनामिक एक्यूरल फंड, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम अपॉर्चुनिटी फंड स्कीम्स को बंद किया गया है।

ग्राहकों को भुगतान नहीं कर सकता है फंड हाउस

इन 6 में से दो स्कीम फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड और फैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड के पास अपने एयूएम का क्रमश: 5 फीसदी और 1 फीसदी कैश सरप्लस है। लेकिन फंड हाउस दोनों स्कीम्स के यूनिटधारकों को नकद भुगतान नहीं कर सकतीं हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न अदालतों में दायर स्कीम्स को रद्द करने के फ्रैंकलिन के कदम के खिलाफ सभी निवेशकों की याचिकाओं को कर्नाटक हाई कोर्ट की पीठ को भेज दिया है। तीन महीने के भीतर सभी मामलों पर फैसला हो जाएगा। ई-वोटिंग के माध्यम से मंजूरी मिलने के बाद ही यूनिटधारकों को स्कीम्स में नकद राशि का भुगतान किया जा सकता है।

समापन के तहत 6 स्कीम्स के लिए होने वाली ई-वोटिंग और यूनिटहोल्डर्स की बैठक तब तक नहीं कराई जा सकती जब तक अदालत अपना फैसला नहीं देती।

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