H-1B वीजा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का नया आदेश; भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को होगा नुकसान


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नई दिल्ली11 मिनट पहले

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  • ट्रंप सरकार ने दूसरे देशों के टेलेंटेंड कर्मचारियों को दिए जाने वाले वीजा की संख्या को कम करने के प्लान की घोषणा की है
  • कोरोना वायरस महामारी के चलते गई नौकरियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है

डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने H-1B वीजा को लेकर नया आदेश जारी किया है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने मंगलवार को H-1B वीजा को लेकर नया रेग्युलेशन जारी किया है। ट्रंप सरकार ने दूसरे देशों के टेलेंटेंड कर्मचारियों को दिए जाने वाले वीजा की संख्या को कम करने के प्लान की घोषणा की है।

70% भारतीय को जारी किया जाता है एच-1बी वीजा

अधिकारियों के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी के चलते गई नौकरियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। ट्रम्प के इस नए आदेश के बाद भारतीय आईटी कंपनियों को झटका लग सकता है हालांकि यह नियम अमेरिकी कर्मचारियों के लिए यह राहत भरी होगी। बता दें कि अमेरिका हर साल 85000 H-1B वीजा जारी करता है।

इसके जरिए अमेरिका नौकरी के लिए विदेशी स्किल्ड वर्कर्स जाते हैं। आंकडे के मुताबिक, अमेरिका जितना H-1B वीजा जारी करता है उसका 70 फीसदी भारतीय प्रोफेशनल्स को जारी किया जाता है। भारत के बाद चीन का नंबर आता है।

क्या है H-1B वीजा?

एच-1 बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के जरिए करती हैं।

नियम के अनुसार, अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। यूएससीआईएस के मुताबिक, एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।



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