Income Tax India|Income Tax Department Update news|Form 26AS| ITR assessment 2019-20 | ITR filing 2020 | Latest News Income Tax Department | Updates in Form 26AS | आपके 20 हजार रुपए से ज्यादा के लेन-देन की जानकारी होगी आयकर विभाग को; रिटर्न जमा करने से पहले फॉर्म 26AS देखना क्यों जरूरी है?


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35 मिनट पहले

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  • फॉर्म 26AS एक इनक्लूसिव डॉक्यूमेंट है जिसका इस्तेमाल टैक्सपेयर के लिए रिटर्न फाइलिंग और असेसमेंट में मददगार होगा
  • 30 नवंबर तक भर सकते हैं 2019-20 की आय पर कर; वर्ष 2018-19 की आय पर लेट-फी के साथ 30 सितंबर तक आईटीआर जमा करने की छूट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अगस्त 2020 को पारदर्शी टैक्सेशन प्लेटफार्म लॉन्च किया। टैक्स कम्प्लाइंस, फेसलेस असेसमेंट और फाइलिंग रिटर्न्स को सरल बनाने के लिए सुधार घोषित किए। जब पूरा सिस्टम ही बदल रहा है तो केंद्र सरकार ने टैक्स डिसक्लोजर में लेन-देन की सीमा घटाने का प्रस्ताव किया है। ताकि इनकम टैक्स बेस बढ़ सके और कर चोरी को रोका जा सके।

कोरोना की वजह से पूरी अर्थव्यवस्था ही डगमगा गई है। इस वजह से सरकार ने इस साल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख जुलाई के बजाय नवंबर में रखी है। जून 2020 में नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि फॉर्म 26AS में अब और अधिक जानकारी शामिल होगी।

सबसे पहले, क्या है फॉर्म 26AS?

  • फॉर्म 26AS एनुअल टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट है। टैक्सपेयर इसे इनकम टैक्स पोर्टल पर बने अपने अकाउंट से टैक्सपेयर डाउनलोड कर सकता है। इसमें आपकी आय पर काटे गए टैक्स की जानकारी होती है।
  • साथ ही आपसे टैक्स कलेक्टर की ओर से वसूला गया टैक्स, चुकाया गया एडवांस टैक्स, सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पेमेंट, रेगुलर असेसमेंट टैक्स, वित्त वर्ष में आपको मिला हुआ रिफंड और साथ ही शेयर, म्युचुअल फंड्स आदि के संबंध में हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन का डिटेल होता है।
  • फिलहाल 30 लाख रुपए से ज्यादा की प्रॉपर्टी की खरीद, 10 लाख रुपए से ज्यादा के शेयर, म्युचुअल फंड, डीमैट, क्रेडिट कार्ड भुगतान और फिक्स डिपॉजिट पर ही आयकर विभाग को सूचित किया जाता है।

फॉर्म 26AS में क्या बदलाव होने वाला है?

  • यह फॉर्म अब टैक्सपेयर का पूरा प्रोफाइल बन जाएगा। इसमें उसका मोबाइल नंबर और पासपोर्ट नंबर भी दर्ज होगा। इसमें 20 हजार रुपए से ज्यादा के होटल बिल समेत कई व्हाइट गुड्स पर्चेस के लिए किए जाने वाले खर्च का ब्योरा सामने आ जाएगा। ताकि आप जब रिटर्न फाइल करें तो आपको पता हो कि बीते वर्ष में आपने क्या-क्या और कितना खर्च किया है।
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फॉर्म 26AS में किए बदलावों से क्या बदल जाएगा?

  • टैक्स-मेट कंसल्टेंसी में पार्टनर सचिन अवस्थी का कहना है कि जून 2020 से फॉर्म 26AS साल में एक बार भरने वाला फॉर्म नहीं रह गया है। यह एक लाइव फॉर्म है जो सालभर अपडेट होता रहेगा।
  • इससे किसी भी टैक्सपेयर की पूरी प्रोफाइल मिल सकेगी। सीबीडीटी ने डीजी सिस्टम्स या किसी भी अन्य अधिकारी को इसमें अपलोड करने की अनुमति दी है। यानी कस्टम, जीएसटी, बेनामी कानून जैसे मामलों में पारित आदेश भी इस पर अपडेट होते रहेंगे। न केवल टैक्सपेयर बल्कि इनकम टैक्स विभाग को भी यह जानकारी उपलब्ध होगी।
  • यह प्रत्येक टैक्सपेयर को किसी भी बैंक/फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन/अथॉरिटी से किसी भी कानून या टैक्स डिमांड, टैक्स डिस्प्यूट्स संबंधी जानकारी छिपाना मुश्किल हो जाएगा। सभी के लिए पासपोर्ट नंबर बताना अनिवार्य रहेगा।

आईटीआर जमा करने से पहले क्यों देखें फॉर्म 26AS?

  • टैक्सपेयर के लेन-देन और भुगतानों के बारे में कई ऐसी जानकारियां होती हैं, जो आयकर विभाग के पास अलग-अलग स्रोतों से पहुंचती है। यह सभी जानकारी अब फॉर्म 26AS के जरिये टैक्सपेयर के सामने भी होगी।
  • इससे कम्प्लाइंस बढ़ेगा और टैक्सपेयर को रिटर्न फाइल करने में आसानी होगी। गलतियां कम होंगी और मुकदमेबाजी घटकर टैक्सपेयर और टैक्स डिपार्टमेंट के बीच विश्वास का माहौल बनेगा।
  • टैक्स रिटर्न की स्क्रूटनी और इस कार्यवाही में लगने वाले वक्त में अक्सर टैक्सपेयर के लिए अनिश्चितता बनी रहती है। यह नई व्यवस्था टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन में ओवरऑल पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगी।
  • फॉर्म 26AS में बदलाव एक तीर से दो निशाने बनेंगे। ईमानदार टैक्सपेयर को अपडेटेड इंफर्मेशन से सटीक आईटीआर दाखिल करने में मदद मिलेगी। वहीं, लोग किसी खास वित्तीय लेन-देन की सूचना छिपाने से भी बचेंगे।

फॉर्म 26AS देखने से आपको क्या फायदा होगा?

  • जून 2020 से कई टैक्स-पेयर्स को नोटिस मिलने लगे हैं। उनसे पूछा जा रहा है कि हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन उन्होंने किया है या नहीं? यदि आप हां या नहीं में जवाब देते हैं तो इनकम टैक्स रिटर्न में उसे क्रॉस-वेरिफाई किया जाता है।
  • हालांकि, व्यक्ति के पास इसमें तीन विकल्प हो सकते हैं। जानकारी सही है, गलत है या डुप्लीकेट है। यदि आप प्रश्न का जवाब नहीं के तौर पर देते हैं तो विभाग उस कंपनी से वेरिफाई करता है जिसने वह सूचना दी थी। यदि आप गलत निकलते हैं तो आपको अपना इनकम टैक्स रिटर्न संशोधित करना होगा।

नए टैक्सपेयर चार्टर और इन प्रस्तावों में क्या संबंध है?

  • दरअसल, टैक्सपेयर चार्टर में एक बात पर जोर दिया गया है। वह यह कि आपको विभाग ईमानदार मानकर चलेगा। यदि आप फॉर्म 26AS में दर्ज हुए लेन-देन का जिक्र किए बगैर रिटर्न फाइल करेंगे तो इसे आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसे टूल्स की मदद से पकड़ लेगा। तब विभाग को आपके ऊपर कार्रवाई का मौका भी मिल जाएगा।

टैक्स नेट बढ़ाने का भी कोई प्रस्ताव है क्या?

  • सरकार के नए प्रस्ताव के मुताबिक यदि आपके बैंक खाते से 30 लाख रुपए से ज्यादा का लेन-देन हुआ है तो आपको टैक्स रिटर्न फाइल करना ही होगा। भले ही आपका कोई लेन-देन इनकम टैक्स को रिपोर्ट हुआ हो या न हुआ हो।
  • इसके अलावा जिन पेशेवरों और कारोबारों का सालाना टर्नओवर 50 लाख रुपए से ज्यादा का है या 40 हजार रुपए से ज्यादा का किराया आ/जा रहा है तो रिटर्न फाइल करना आवश्यक होगा।

क्या होगा यदि आपने आईटीआर फाइल नहीं की?

  • मौजूदा कानून के मुताबिक आप एक से ज्यादा साल के लिए आईटीआर फाइल नहीं कर सकते। 2018-19 के लिए आईटीआर फाइल करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2020 है। यदि आपने अप्रैल-2018 से मार्च-2019 के बीच की अपनी आय पर कर नहीं चुकाया है तो सितंबर तक आपको मौका मिला है।
  • यदि आपकी आय 5 लाख रुपए से कम रही है तो आपको 1,000 रुपए की लेट फी जमा करनी होगी और यदि आय 5 लाख रुपए से ज्यादा है तो आपको 10 हजार रुपए लेट-फी जमा करनी होगी।
  • यदि टैक्स का भुगतान 31 मार्च 2020 से पहले नहीं हो सका है तो आपको न चुकाए कर पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। यदि रिटर्न जमा नहीं किया तो आप पर लगने वाले कर का 50% जुर्माना वसूला जा सकता है।
  • यदि फिर भी आपने आईटीआर दाखिल नहीं किया तो टैक्स कानून के तहत तीन साल से सात साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि, यदि वसूला जाने वाला कर 10 हजार रुपए से कम का है तो कोई मुकदमेबाजी नहीं होगी।

क्या इस नई व्यवस्था से टैक्स चोरी रुक जाएगी?

  • उम्मीद तो कर ही सकते हैं। अब तक टैक्स विभाग डीमैट अकाउंट, म्युचुअल फंड और बैंक लेन-देन से आमदनी और खर्च का अंदाज लगाता था। एआई और डेटा एनालिटिक्स से मनी ट्रेल पकड़ना आसान हो गया है।
  • टैक्स विभाग को स्क्रूटनी में ऐसे मामले दिखे जहां खर्च और रिटर्न में तालमेल नहीं था। कुछ लोगों ने बिजली बिल ही आय से ज्यादा जमा किए हैं। उन्हें नोटिस जारी किया और टैक्स की रिकवरी शुरू की गई।

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