Lakhimpur Khiri Rape Case Latest News And Updates: Girl Victim Family Demand Justice In Lakhimpur Uttar Pradesh | बेटी को पढ़ाना चाहती थी मां, पिता बोले-दो चार दिन में परिवार के साथ कमाने हरियाणा जाना था, तब तक ये हो गया


लखीमपुर7 मिनट पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव

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प्रतीकात्मक फोटो।

  • लखनऊ में मजदूरी करता था पिता, कोरोना संकट काल में गांव लौट आया था
  • गांव में कभी नहीं हुए ऐसी दरिंदगी, आरोपियों को फांसी मिले, तभी बेटी को मिलेगा इंसाफ
  • हत्या के बाद आरोपियों ने बच्ची के शव को गन्ने के खेत में फेंका दिया, शुक्रवार दोपहर से लापता थी

लखीमपुर जिले में 13 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी के बाद उसकी हत्या कर दी गई। फोन पर दैनिक भास्कर से बच्ची के पिता ने कहा- दो चार दिन में ही हरियाणा कमाने जाने वाला था, लेकिन ये घटना हो गई। कोरोना के चलते लखनऊ से लौटा था। वे बेटी के बचपने को याद करते हुए बार-बार भावुक हो जाते हैं। कहा कि, उसे दो चोटी बांधना बड़ा पसंद था। सहेलियों के साथ इक्कल दुक्कल (लंगड़ी टांग बनाकर खेलना) भी खूब खेलती थी। पता नहीं हमारे परिवार को किसकी नजर लग गयी। हमारी तो किसी से रंजिश भी नहीं थी। बदहोश मां के मुंह से बस यही निकल रहा है कि मेरी इकलौती बेटी थी। उसे मैं इतना तो पढ़ाना ही चाहती थी कि वह अपने हाथों से दस्तखत कर ले। अब मेरा ख्याल कौन रखेगा?

घर में शौचालय, पता नही क्यों बाहर गयी?

पिता ने कहा कि, घर में शौचालय बना हुआ है। हम लोग शौच के लिए यही प्रयोग करते हैं। आखिर वह खेत क्यों गई, यह समझ नहीं आ रहा है। मां ने रोते हुए बताया कि दिन में बिटिया ने खाना बनाया। दोनों मिलकर साथ खाए भी। उसके बाद वह बर्तन वगैरह में व्यस्त हो गयी। फिर हम खेत चले गए। खेत से लौटे तो बिटिया घर में दिखी नहीं तो हमने अपनी बहू से पूछा। उसने कहा हम तो बच्चों के साथ सो रहे थे। हमें नहीं मालूम है। पिता ने बताया कि फिर हम लोग थोड़ा इंतजार किए। जब लगभग 2 बज गए तो हम सबने ढूंढना शुरू किया। गन्ने के खेत की तरफ भी गए तो जो दो लोग पकड़े गए हैं, वह मेढ़ पर बैठे थे। दो बार हम उधर गए और उन लोगों ने कहा इधर लड़की नहीं आई है। फिर हमने खेत में जाकर देखा तो बेटी की आंखें फोड़ी हुई थीं, जुबान कटी हुई थी। फिर मेरे बताने पर पुलिस ने दोनों संदिग्धों को पकड़ लिया। हालांकि, पुलिस ने आंख फोड़े जाने व जुबान काटे जाने की बात से इंकार किया है।

असली आरोपी कौन ये हमें नहीं मालूम? पुलिस सही आरोपी को पकड़े

पिता का कहना है कि मेरे बताने पर जिन दो लोगों को पकड़ा गया है, मुझे नहीं पता कि वह सही आरोपी हैं या नहीं। वह संदिग्ध लगे तो हमने उन्हें बताया। बाकी पुलिस सही आरोपियों को पकड़ कर मुझे दिखाए और हमें इंसाफ के नाम पर सिर्फ आरोपियों की फांसी ही चाहिए। उन्होंने कहा-मेरे पुरखे इस गांव में रहते थे। हमने इस गांव में जन्म लिया, लेकिन ऐसी घटना कभी नहीं हुई। यह पहली बार हुआ और (रोते हुए) मेरी बेटी के साथ ही हुआ।

महामारी के चलते काम से लौट आया था

पिता बताते है कि बहुत थोड़ी बहुत जमीन है। जिससे परिवार का खर्च नहीं चलता है। जिसकी वजह से हम बाहर काम करने जाते हैं। पहले लखनऊ में मजदूरी कर रहा था। कोरोना की वजह से लौट आया था। तब से यहीं था। किसी तरह गुजर बसर हो रही थी। अब एक ठेकेदार से दस हजार रुपए बयाना लिया था। 20 अगस्त को परिवार समेत हरियाणा एक ईंट भट्ठे पर जाना था। वहां ईंट पथाई का काम था। इसी सब की तैयारी चल रही थी कि ये हादसा हो गया। उन्होंने बताया परिवार में पत्नी, दो बेटे एक बहु और इकलौती 13 साल की बिटिया थी।

दस्तखत करने लायक तो पढ़ाना ही चाहता था

मां ने कहा कि, हम लोग जहां भी काम करने जाते हैं। वहां बिटिया भी साथ होती थी तो कोई प्राइमरी स्कूल मिला तो उसी में डाल देते थे। हम चाहते थे कि कम से कम दस्तखत करने लायक तो पढ़ाई कर ही ले। क्योंकि आगे पढ़ाने की हमारी हैसियत नहीं है। मेरा एक बेटा भी दस्तखत कर लेता है। मेरे दोनों बेटे भी मजदूरी करते हैं। वह भी अलग अलग जाते है काम करने लेकिन इस बार हम सब इकट्ठा हरियाणा जा रहे थे।

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