LIVE UPDATES: कृषि कानूनों के खिलाफ विधानसभा में पंजाब के CM का प्रस्ताव, कहा- नया अध्यादेश ला MSP शामिल करें


पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य विधानसभा के पटल पर एक प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव कृषि अध्यादेशों और विद्युत अधिनियम में संशोधन के खिलाफ सरकार की चिंताओं पर है। बता दें कि विपक्ष ने पंजाब सरकार को विशेष विधानसभा सत्र के पहले दिन केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरुद्ध बात न करने के लिए आड़े हाथ लिया था। जिसमें 13 आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सदन में धरना दिया।

सोमवार को, वित्त और कार्यवाहक संसदीय मामलों के मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि राज्य सरकार नए कृषि कानूनों का मुकाबला करने के लिए कानून के मुद्दे पर संवैधानिक विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है और सत्र के दौरान विभिन्न विधेयकों की प्रतियों को जोड़ दिया जाएगा। 

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-उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार कृषि का मसला राज्य सरकार के हाथ में है, लेकिन इसपर केंद्र ने खुद ही निर्णय ले लिया जो कि नियमों का उल्लंघन है। ऐसे में अंतिम फैसला राज्यों के ऊपर होना चाहिए।

-अमरिंदर ने ऐलान किया कि अब इस बिल के आधार पर राज्य सरकार आगे की कानूनी लड़ाई लड़ेगी।

-इस दौरान कैप्टन ने आम आदमी पार्टी के विधायकों पर भी तंज किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विधानसभा में रात गुजार रहे हैं तो कोई ट्रैक्टर पर आ रहा है। इस तरह की चीजों से इन मुद्दों से कुछ नहीं होगा, प्रदर्शन से कोई फायदा नहीं है जबतक हम केंद्र के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई ना लड़ें। 

-अमरिंदर ने इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की है कि ताजा अध्यादेश लाया जाए, जिसमें एमएसपी को शामिल किया जाए। साथ ही सरकारी एजेंसियों की प्रक्रिया को मजबूत किया जाए। कैप्टन अमरिंदर ने इस दौरान सभी से अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को इस मसले पर एकजुट होने की जरूरत है।

सोमवार दोपहर के लिए सत्र के स्थगित होने के बाद भी, AAP विधायकों ने केंद्र द्वारा बनाए गए कानून का मुकाबला करने के लिए विधेयक की प्रतियों की मांग करते हुए अपना धरना जारी रखा। देर रात, विपक्ष के नेता और AAP नेता हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हम रात भर यहां बैठेंगे और विरोध जारी रखेंगे क्योंकि सत्र के दौरान हमें अभी तक इस और अन्य विधेयकों की प्रतियां मिलनी बाकी हैं। चीमा ने कहा “AAP कृषि कानूनों के खिलाफ कानून का समर्थन करेगी लेकिन सरकार को हमें इसकी प्रतियां देनी चाहिए। हमें अन्य बिलों की प्रतियां भी नहीं मिलीं। हमारे विधायक महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और बहस कैसे कर सकते हैं? ”।





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