There was no one to take care of the house, so the infected grandparents and father wearing PPE kit brought the mother’s baby girl to the hospital | घर में ख्याल रखने वाला कोई नहीं था इसलिए पीपीई किट पहने संक्रमित दादा-दादी और पिता बिन मां की बच्ची को अस्पताल ले आए


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नई दिल्ली10 मिनट पहले

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फोटो उदयपुर के फांदोतों की गली का है, जहां बेटे समेत वृद्ध दंपती में संक्रमण की पुष्टि हुई। दंपती की पांच साल की पोती स्वस्थ है। उसकी मां इस दुनिया में नहीं है। जब मेडिकल टीम तीनों संक्रमितों को लेने पहुंची तो परिवार को चिंता इस बात की हो गई कि घर में बच्ची को संभालेगा कौन।

दंपती के दो बेटे और हैं, लेकिन एक को दो दिन पहले ही कोरोना संक्रमण होने पर उदयपुर के ईएसआईसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी पत्नी पीहर में है। तीसरा बेटा डूंगला (चित्तौड़गढ़) में परिवार के साथ रहता है। बच्ची दादा-दादी के अलावा किसी के भी साथ पलभर नहीं रहती। तय किया कि बच्ची को भी अस्पताल में साथ रखेंगे।

गुजरात और महाराष्ट्र में सावन का पहला सोमवार

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हिंदू कैलेंडर के हिसाब से सावन के चार सोमवार निकल चुके हैं। लेकिन मराठी और गुजराती कैलेंडर के हिसाब सावन का पहला सोमवार 27 जुलाई को पड़ा। इस मौके पर गुजरात के सोमनाथ जिले के सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से इस प्रथम शिवलिंग का शृंगार किया गया। इस दौरान महाआरती और सोमेश्वर महादेव का अभिषेक व विशेष पूजा अर्चना की गई। खास बात यह रही कि महामारी के चलते भी यहां श्रद्धालु पहुंचे और बाबा के दर्शन किए। मंदिर के बाहर लंबी कतारें लग गई थीं। हालांकि सभी श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी किया।

महाकालेश्वर की चौथी नगर भ्रमण यात्रा

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श्रावण में महाकालेश्वर की चौथी नगर भ्रमण यात्रा भीड़ कम होने के कारण डेढ़ घंटे में ही मंदिर लौट आई। सवारी शाम ठीक 4 बजे मंदिर के सभामंडप से रवाना हुई। 4.34 पर सवारी रामघाट पहुंच गई थी। रामघाट पर पूजन के बाद सवारी फिर 4.55 पर रवाना होकर 5.14 बजे हरसिद्धि मंदिर और 5. 40 बजे महाकाल मंदिर पहुंच गई। सवारी में इस बार बहुत कम लोग दिखाई दिए। इसलिए पालकी के आसपास से पुलिस का रस्सा घेरा भी हटा दिया गया था। जगह-जगह पूजन के लिए भी पालकी नहीं रुकी।

कोरोना के बीच राखी का त्योहार

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फोटो चंडीगढ़ की है। कोरोना काल के बीच राखी का त्योहार आ रहा है। सुंदरकांड की सदस्य 32 फुट के पंचमुखी श्री हनुमान जी के लिए 7 फुट की राखी तैयार कर रही हैं। हनुमंत धाम सेक्टर-40 में यह राखी 3 अगस्त को सभा की सदस्य हनुमान जी की कलाई पर मंत्रों-उच्चारण के साथ बांधेंगी। यह राखी 15 दिन में तैयार होगी। इस राखी को सभा की सदस्य नीना तिवारी, रंजू ग्रोवर, प्रेमलता, पाल शर्मा, सुदर्शन शर्मा और उषा सिंगला बना रही हैं।

खेती के औजार बने प्रदर्शन का हथियार

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फोटो पंजाब के पटियाला की है। किसान संगठनों ने सोमवार को प्रदेशभर में ट्रैक्टर रैलियां निकालीं। पटियाला में 275 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ किसानों ने केंद्र के कृषि आर्डिनेंस के खिलाफ प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि तेल की बढ़ी कीमतें वापस ली जाएं। खेती सुधार 3 ऑर्डिनेंस बिजली एक्ट को रद्द किया जाए। रैली ठीकरीवाला चौक से शुरू होकर थापर यूनिवर्सिटी 22 नंबर फाटक, भवन चौक पर समाप्त हुई।

जहां बोर्ड लगाया वहीं काम शुरू

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छत्तीसगढ़ के केंवची में आबकारी विभाग का दफ्तर नहीं है। खाली बोर्ड है जहां लगा दिया वहीं काम शुरू हो जाता है। कभी पेड़ के नीचे तो कभी सड़क पर दफ्तर बना होता है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के केंवची में आबकारी विभाग का दफ्तर नहीं है पर कार्यालय का बोर्ड बनवाकर रखा है। जहां मर्जी आती है वहां इसे टांगकर काम शुरू कर लेते हैं।

आदित्य को प्रतिष्ठित ‘गुस्ताव ट्रूव’ अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड

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भारत की पहली सौर-ऊर्जा संचालित फेरी ‘आदित्य’ को इलेक्ट्रिक बोट्स और बोटिंग में उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित ‘गुस्ताव ट्रूव’ अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। अवॉर्ड प्रदाता ने लिखा- ‘यह एक साल में 5.8 लाख लोगों को ले जाती है। इसकी एक दिन की चार्जिंग की लागत 2.60 डॉलर (करीब 195 रुपए) है। इससे एक साल में 58,000 लीटर डीजल की खपत कम होती है। लिहाजा, फेरी ने सालभर में करीब 46.12 लाख रुपए की बचत की।’ इसे 2017 में केरल में कोट्‌टायम जिले के वेंबनाड बैकवाटर्स में यकोट्टायम से अलाप्पुझा के बीच शुरू किया गया था।

अब तो छत ही बची है रहने के लिए

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बिहार के शेखपुर पंचायत में बूढ़ी गंडक नदी में जल स्तर में लगातार वृद्धि हाेने से लगभग पांच हजार पक्का मकान और झाेपड़ी पानी में डूब गए। घर में फंसे लोग दो मंजिला मकान पर इस तरह रह रहे हैं और बढ़ रहे जलस्तर को हर दिन मायूसी से देखते रहते हैं।
अपने सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जा रहे लोग

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यह तस्वीर मुजफ्फरपुर के शेखपुर पंचायत की है। बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाेने से लगभग पांच हजार मकान और झाेपड़ी पानी में डूब गए हैं। घर जलमग्न हो जाने कारण किसी तरह अपने सामान को सुरक्षित जगह पर ले जाता एक परिवार।

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